Important announcement!

Hello,

how are you all?

I hope You all are doing great, It has been a long time since last time I posted anything on my blog, actually I am super busy nowadays because I am handling multiple tasks at a time , you may think that I am going to spoil my root but I can’t help I am not in mood to leave anything which is going on in my daily life, if we talk about my blog then I would love to inform you that since last 6 months I was confused to decide that I should continue my writing on free WordPress Blog or I should shift my blog to self-hosted WordPress, finally last week I purchased domain and web hosting, and since that day I am continuously working on the web designing that’s why I couldn’t post anything until I complete that task.

I am sorry for not being here for last few weeks but soon I will start posting on my new blog so please forgive me and keep supporting me because I need your support to start that blog from zero level.

Still, I haven’t posted anything there but please subscribe my new website so that you never miss my new post.

 

If anyone here is planning to start a self-hosted blog then feel free to contact me for any help or you can ask any query or doubt, I would love to answer.

Mail me at – shubhankarsharma428@gmail.com

Please don’t forget to follow my new blog –  http://shubhankarthinks.com

Note – after clicking this link you will have to go 

Thanks again!

Lots of love!

 

कैसे हैं आप सभी लोग ?

आप सभी से क्षमा चाहता हूँ क्योंकि मैं लंबे समय से यहाँ अनुपस्थित था , दरअसल मैं अपने नए ब्लॉग को डिज़ाइन करने में व्यस्त हूँ मगर जल्द ही नए ब्लॉग पर पोस्ट करना शुरु करूँगा इसलिए कृपया आप सभी उस ब्लॉग को भी फॉलो कर लें ताकि आप मेरा कोई नया पोस्ट पढ़ने से वंचित ना रहें या फिर मुझे आपका ब्लॉग पढ़ने का मौका ना मिल पाए |

अगर आप भी सेल्फ होस्टेड ब्लॉग के बारे में सोच रहे हैं तो मैं आपको पूरी राय खुशी खुशी दूंगा ,आप अपनी राय कमेंट में बता सकते हैं |

बहुत बहुत धन्यवाद आप सभी का !

नमस्कार

Mail me at – shubhankarsharma428@gmail.com

Please don’t forget to follow my new blog –  http://shubhankarthinks.com 

 

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We are 500+ now ! IBA2017

Hey , How are you all?

follower

Hope you all are doing great, I just got notification from WP that my blog has been completed 500 followers believe me when I started blogging that time this number was just a dream but now this is for real because of your warm love and support.

Thanks for reading my blogs and giving me such motivational comments which always push me to write more and more, due to busy schedule, I am not writing regularly, but still I am trying to write at least one post on every weekend as well as I try to read maximum posts as much as possible but still I missed plenty numbers of good posts, I am really sorry if I missed your wonderful article/poetry, I hope soon I could start blogging on a regular basis.

And one more thing you can post your blog/post link in the comment box if you are beginner like me so that I could read your new blog.I would like to clarify a few points, I hope you will take it positively– .

1- I am sorry if I ever made any candid discussion with you or you faced unvarnished comment.

2- Please never play like, follow the game, please be honest to WordPress.

3- If you are liking 10-20 posts within a minute it means you are not reading any single post as well as you are hurting the emotions of a writer.

4- Please be honest to every writer/blogger, if you are ignoring someone’s mistakes, that means you are not giving him/her a chance to improve. Please try to keep the standards and integrity of literature.

5- At last, I am sorry!Please forgive me if I am being rude and moody.Ping me by giving a comment if I haven’t followed your blog (especially for new bloggers).

Keep supporting , Love you all .

Note – Guys I have been nominated my blog for #IBA2017 so they are asking for reader testimonials/comments so please don’t forget to give positive lovely honest reviews in the fb comment plugin (Please click on fb comment button and submit testimonial ).

 

.

Thanks for reading till the end .

चिंगारी उठी कोई ,जल उठा शहर मेरा!

​चिंगारी उठी कोई फिर ,

छिट पुट सी बातों में जलने लगा शहर मेरा !

ना होश है उन्हें अपनों का , 

ना रहा कोई तेरा मेरा |


किसी ने बीच में जाकर सभी से प्रश्न ये पूछा ?

“क्या यही सिखलाता है मजहब – धर्म तेरा ?”


मचलकर लोग गुस्से में तुनक कर गुमान से बोले 

“ये शुरुआत थी अभी तक कि , हम पूरा जहाँ जला देंगे !”

Jla do

बड़ा विचलित हुआ वो सुनकर फिर भयभीत से कठोर स्वर में बोला –



” ये लो माचिस और ये ईंधन भी ,

जला दो अब ये शहर सारा!

ये घर सारे जला देना,

जला देना वो चौराहा !


वाहन भी जला दो तुम,

दुकानें भी जला देना !

किसी के आशियाने उजाड़ दो तुम,

किसी की रोजगारी जला देना |



जला दो वो शिला लेख सारे,

जिसमें इंसानियत का सबब हो!

जला दो वो तहज़ीब विरासत भी,

जिसमें आदाब-ओ – अदब हो |



वतन परस्ती की इबादतें भी ,

कानूनी हिसाब तुम जला देना !

मानवता सिखाने वाली,

किताबें तुम जला देना|


जलाकर राख कर दो तुम ,

मेरे देशी अरमानों को !

रहे बाकी कुछ जलाने को,

तुम मुझको भी जला देना |



बनेगी राख जब इन सबकी ,

हवा में मिलावटें होंगी!

तुम्हारे इन साफ चेहरों पर ,

कल जब कलिखें होंगी !


भले ही दर्ज ना हो तुमपर कोई आपत्ति अदालत में ,

मगर ऊपर वाले की अदालत में सुनवाईयाँ जरूर होंगी |”


वो खरा इंसान अभी इतना ही बोल पाया ,

उसकी तिरस्कारपूर्ण बातें सुनकर एक चतुर प्राणी चकराया !

पूरे माजरे को समझने में उसने एक मिनट ना लगाया!

फिर भीड़ को चीरकर वो जोरों से चिल्लाया –


ये प्रवचन नहीं दे रहा भक्तों , कर रहा ये हमारी कठोर निन्दा है !

ये पक्का कोई कांग्रेसी है या फिर बीजेपी का कोई नया एजेंडा है|”

इतने सुनने भर की देरी थी बस,

उठी लाठी चली कृपाण तन कर,

फिर टूट पड़े सब उस सज्जन पर!


चिंगारी उठी कोई,

फिर जल उठा शहर सारा|


© ConfusedThoughts

– Shubhankar

Do listen the audio version of this poem.

राम रहीम के समर्थकों से जलता मेरा भारत !

​जला दो तुम मक़ान सारे ,

जला दो तुम शहर सारा,

ना आज का तुमको होश 

ना कल की सोचता है ये मूढ़ बुद्धि दिमाग तुम्हारा!
क्षमा चाहूँगा ये लेख मैं बिना किसी योजना के शुरू कर रहा हूँ ,क्योंकि पिछले ४-५ घंटों से लगातार मेरे अंदर भावनाएं हिलोरे खा रहीं हैं अगर मैंने अब कुछ नहीं लिखा तो मैं खुद में उलझकर रह जाऊँगा!

खैर मुद्दे की बात पर आते हैं , आज डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम उर्फ गुरमीत पर बलात्कार के आरोप सिद्ध हो गए हैं ,जो २००३ में उनकी ही एक शिष्या ने उनपर लगाए थे |

ये फैसला स्वागत के योग्य है इसमें कुछ बड़ी बात नहीं थी क्योंकि न्यायपालिका का उपयोग न्याय के लिए ही होता आया है और आगे भी होगा चाहे वो ट्रिपल तलाक़ की बात हो या फिर रेप के आरोपी को फांसी की सजा की !

मगर अभी कुछ अलग हुआ हरियाणा और दिल्ली में बाबा जी के समर्थकों ने दोपहर से तोड़फोड़ शुरू की थी और अब ये तोड़फोड़ खूनी हिंसा में तब्दील हो चुकी हैं जिसमें अभी तक 17 लोग मर चुके हैं और ४८ लोग बुरी तरह घायल हैं ,ये एक मीडिया रिपोर्ट है जिससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि आंकड़े अनुमानित हैं , असल स्थिति कुछ और भी भयानक होगी |

दिल्ली का आनंद विहार रेलवे और बस स्टैंड दोनों को खंडहर में तब्दील कर चुके हैं ये लोग!
पिछले 2दिन से इंटरनेट सेवा , स्कूल्स, कॉलेजेस सब कुछ बन्द किया हुआ था सिर्फ इसी फैसले की वजह से !मुझे एक बात अभी तक समझ नहीं आयी आखिर इतनी सतर्कता के बावजूद भी लोग बाज नहीं आये और उन्होंने अपना काम पूरे दिल से किया!

खुद को बाबा का समर्थक बताने वाले ये लोग अंधभक्ति में पागल हो चुके हैं कि इनको ना खुदकी फिक्र है ना देश की !

सबसे पहले तो मुझे आश्चर्य है आखिर सरकार सुबह से चुप क्यों है?

अभी तक सेना बुलाकर सीधा फायरिंग शुरू क्यों नहीं कराई ?

क्योंकि मुझे नहीं लगता ये लोग भारत के एक मुख्य नागरिक के हाशिये में आते हैं , जो लोग देश की संपत्ति या फिर लोगों की जान लेने पर तुले हैं ,उनके साथ दुश्मन जैसा व्यवहार होना लाजिमी है |

चाहे वो इंसान मैं हूँ या फिर मेरा कोई सम्बन्धी , सबके साथ समान रूप से व्यवहार होना चाहिए ,क्योंकि जो सैनिक वहां घायल हो रहे हैं वो भी मेरे संबंधी ,भाई या फिर हितेषी हैं जो व्यर्थ के मुद्दे पर अपना लहू बहा रहे हैं|
अब आता हूँ मैं राजनीति के मुद्दे पर , कड़वी बातें मैं कोई आज नई नहीं बोल रहा , मेरे लेख मैं आप हमेशा क्रिटिसिज्म पढ़ते होंगे क्योंकि मैं दुनिया को एक कोने से बैठकर नहीं देखता, मैं देखता हूँ हर एक दिशा से ताकि सच को सच और गलत को गलत बता सकूँ, फिर चाहे किसी को मेरी बात अच्छी लगे या फिर नए विरोधी तैयार हो जाएं मेरी एक बात से |

अभी दो तीन दिन पहले जब ट्रिपल तलाक़ का फैसला आया था तो कुछ पॉलिटिशियन उसे अच्छा बता रहे थे और कुछ इसे धार्मिक दखलंदाजी , असलियत ये है ,कि ना तो उन्हें फैसले से फर्क पड़ता है ना ही धर्म से !

ये वो लोग हैं जो इंसान की चमड़ी बेचकर भी पैसा कमा सकते हैं , आज के फैसले पर किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई क्योंकि इसमें अनुसूचित जाति, मुस्लिम या फिर धर्म जैसा कोई मजेदार पहलू नहीं था , अब आप ही बताओ अगर मजेदार मुद्दा नहीं होगा तो ये लोग क्यों दिलचस्पी लेने लगे !

रेप होना तो बहुत साधारण है इनके लिए वरना ये मुद्दा तो २००३ में ही सुलझ चुका होता , अब जब कोई मैदान नहीं होगा तो ये लोग खेलने नहीं जाएंगे |
आपको याद ही होगा जाट आंदोलन में भी खूब नौटंकी हुई थी, क्योंकि वहां खट्टर की सरकार है तो विपक्ष को भी दंगा कराने में मजा आया था |

आखिर ऐसे ही मौके की तो तलाश होती है उनको कब हाथ सेंकने को मिले और हमारी पूर्ण बहुमत वाली केंद्र सरकार को खुदपर इतना भी भरोसा नहीं है कि एक सख्त निर्णय बिना किसी बैठक के ले सके !

ये लोग सलाह मश्विराह में इतना समय लगा देते हैं तब तक विध्वंस हो चुका होता है|

आखिर रणनीति राजनीति के खिलाड़ी जो ठहरे , बिना किसी प्रयोजन के ये कदम नहीं उठा सकते |
अब बात करते हैं अंधभक्तों की , आप लोग अपने उज्ज्वल भविष्य और उन्नति के लिए किसी बाबा या साधु की शरण में जाते हैं और उसे भगवान घोषित भी कर देते हैं !

अक्ल बेच खाई है क्या बेवकूफों?

श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि प्रत्येक जीव के अंदर एक आत्मा निवास करती है जिसका संबंध सीधे परमात्मा से है|

इसका मतलब ये हुआ कि आपका सीधा संपर्क परमात्मा से है तो फिर आप लोग सीधी बात खुदसे नहीं कर पाते क्या ?उसके लिए किसी के तलवे चाटने की आवश्यकता क्या है?

जो भी मांगना है खुदसे मांगों , भगवान ने आपको इतना समर्थ बनाया है कि आप खुदका भाग्य लिख सकते हो फिर क्यों आपको किसी चमत्कार करिश्मा की खोज रहती है ?

आप खुद एक चमत्कार हो जो कर्म से कुछ भी संभव कर सकता है फिर क्यों आप लोग अपने कर्म छोड़कर इस आडम्बर में स्वांग रचने जाते हो !

मैं बाबा और संत जनों का हृदय से सम्मान करता हूँ अगर वो संत धर्म और ज्ञान का प्रचार प्रसार करे और सदभावना का संदेश फैलाये , अगर वो खुदको चमत्कारी या फिर भगवान घोषित करता है तो उसे ढोंगी बोलने में कोई हर्ज नहीं है|

गुरु का काम अंधकार को मिटाकर उजाला लाना है , अपने अंधभक्त बनाना नहीं है !

आप लोग अगर इतने ही जोशीले हो और धर्म को मानने वाले हो तो 

तब आप लोग कहाँ चले जाते हो जब एक निर्दोष की हत्या करके गुंडे चले जाते हैं , जब एक निर्धन परिवार की महिलाओं के साथ दुराचार होता है या फिर सड़क चलती लड़कियों को कुछ मनचले रोज चौराहे पर छेड़ते हैं ,तब ये भीड़ आक्रोश सब कहाँ चला जाता है !

क्या आपका धर्म इस विषय मे कोई संदेश नहीं देता ?

क्या दुराचार धर्म के प्रतिकूल नहीं है क्या ?

मेरा विश्वास मानो मैं अहिंसा वादी नहीं हूं , अगर ये लोग एक रेपिस्ट या फिर हत्यारे को भीड़ जुटाकर मारते तो मैं इसे नृशंसय हत्या करार बिल्कुल नहीं दिया उल्टा मन ही मन शाबासी देता क्योंकि ऐसे सख्त कदम से हजार लोग और भी खुदको सुधार लेते !

मगर नहीं ऐसे मुद्दों पर ये भीड़ गुम हो जाती है , तब कोई उत्पाती निकलकर नहीं आता !

खैर मेरे हाथ थक गए हैं लिखते लिखते !

अब मैं कलम को विराम देता हूँ !

मुझे उत्सुकता से प्रतीक्षा है आपके विचारों की तो अपने विचार इस विषय पर जरूर दें !

धन्यवाद !

© Confused Thoughts

Shubhankar (स्वतंत्र कलम से निष्पक्ष विचार)

सपने क्या होते हैं?

​सपने क्या होते हैं?

अगर शाम ढले बेफ़िक्र होकर ,

लजीज़ खाना खाकर,

पंखा कूलर या फिर ऐसी की ठंडी हवा में ,

मख़मली से आराम गद्दों पर,

बड़े चैन की नींद सो जाते हो आप!

तो क्या खाक सपने देखोगे आप?


सपने वो होते हैं जो रातों की नींदें उड़ा दें,

चैन सुकून को तुम्हारा दुश्मन बता दें,

और इस शांत से दिमाग में कोलाहल मचा दें|



सपने वो नहीं जिन्हें सुबह आंखें खुलते ही भूल जाओ,

सपने वो हैं जिन्हें रात को आंखें मूँदने के बाद भी ना भूल पाओ!

Pic credit – https://pixabay.com/photo-2037255/


सपने वो नहीं जिसमें ऐश- ओ -आराम हो,

मस्त सी जिंदगी चले परेशानी का कोई नाम ना हो !

सपने वो हैं जिसमें आराम हराम हो,

तुम इन रफ्तार रोकने वाली रातों से भी परेशान हो|



वो सपने भी क्या सपने हुए?

जो बड़ी आसानी से मिल जाएं,

करना कुछ भी पड़े नहीं और सब कुछ बना बनाया मिल जाये !

सपने तो वो हैं जो पग पग पर तुम्हें सताएं,

चुनौतियों से तुम्हें और मजबूत बनाएं|



सपने देखो मगर देखभाल के देखो,

कुछ अपने भीतर खंगाल के देखो!

फिर मिल जायेंगे वो सपने तुम्हें भी,

जो आंखों से तुम्हारी नींदें छीन लेंगे|



© Confused Thoughts

– Shubhankar

कैसे हो आप सभी लोग ?

अब ब्लॉग पर आना काफी कम हो गया है मेरा फिर भी मेरी कोशिश रहती है कि आप सभी के पोस्ट ज्यादा से ज्यादा पढूँ , अगर फिर भी भूलवश कोई ब्लॉग छूट जाता है तो आप कमेंट में मुझे याद दिला सकते हैं ताकि मैं आपकी मूल्यवान रचनाएं पढ़ने से वंचित ना रह जाऊं!

धन्यवाद !

नमस्कार,प्रणाम !

 

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

​विस्फोटकों के डर से,

सेना हटती नहीं हमारी!

Indian Bloggers

अरि दल की  साजिशों से ,

गति रुकती नहीं हमारी!

अवशेष ,संस्कृति से ,

दृष्टि हटती नहीं हमारी !

अपवाद बंदिशों से ,

छवि डिगती नहीं हमारी !

कुछ खास है हममें ,

की हस्ती मिटती नहीं हमारी !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||



आदर्श देख इसके 

लोग सुदूर से आते हैं ,

विचार देख इसके,

चकित रह जाते हैं!

सत्कार देख यहां का,

वो यहीं  बस जाते हैं !

आलोचकों के इरादे सब ,

धरे के धरे रह जाते हैं ||



कोशिश हजार कर लो ,

बंदिश लगा के धर लो !

कसमें लगा लो जितनी ,

ताकत लगा लो जितनी !

मुँह एक साथ खोलेंगे ,

फिर एक स्वर में बोलेंगे –

“आसानी से मिटा दोगे,

हस्ती इतनी छोटी नहीं हमारी !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा” ||



कितने भी जाति , धर्म 

और प्रान्त बना लो ,

छल-प्रपंच सारे तुम लगा लो !

सब अपने अपने गुट बना लो ,

फिर सज्जनों में फूट डालो!

चाहे धर्म की तुम लड़ाईयां लड़ा लो ,

फिर हवाओं में जादू डोलेगा,

देशप्रेम का अमृत घोलेगा !

हर युवा शान से बोलेगा –

“सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा” ||



स्वतंत्रता के रंग में,

ध्वज देख कर गगन में !

सीना  गर्व से चौड़ता है ,

रक्तचाप तेजी से दौड़ता है!

रेशे चढ़ जाते हैं मेरे ,

कलाइयों और हाथों के!

ह्रदय तेज से धड़कता है,

हर एक अंग फडकता !

और मन कामनाओं में डूबा

की यहाँ जन्म हो दोबारा ,

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||



भूतल  के  अंक में  ,

गढ़ा है तिरंगा प्यारा !

समतल से प्रांगण में ,

रहे स्वाभिमान हमारा !

उन्नति के प्रयास हों ,

ये ध्येय रहे हमारा !

हस्ती यूं हीं जीवित रहे ,

उद्देश्य ये हमारा !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||

जय हिंद, जय भारत !


आप मेरी इस कविता को मेरी आवाज में सुनना ना भूलें 

लिंक



©Confused Thoughts

शुभांकर

ये थोड़ा बेवकूफाना है मगर आप अपने विचार इस लिंक पर दे सकते हैं 😀

बातों को बातों में ही रहने दो !

​आशियाना किसको नहीं भाता ?सबको भाता है ,

तुम्हें नए नए आशियाने भाते हैं ,

और मुझे अच्छे लगते हैं  पुराने मकान!
तुम हर्षोल्लास के साथ नये नये स्थानों पर रहो,

मेरा क्या?मैं ठहरा हठी !

मुझे तुम उसी पुराने मकान में रहने दो !

वो अठखेलियाँ,वार्तालाप सब भूतकाल की बातें हैं ,

अब उन सब बातों को सिर्फ बातें ही रहने दो |

हिंदी चलचित्र पटकथा के समान तुम्हारे इस प्रेम प्रसंग में,

प्रेमी नायक का किरदार मैं नहीं निभा सकता !

हाँ! वो बात अलग है कि नायिका के लिए उपयुक्त पात्र तो तुम भी नहीं थीं!

मगर ये सब बातें हैं इन्हें बातों में रहने दो|

विशिष्ट सुरक्षा घेरे में घिरे तुम्हारे क़ैद मन मस्तिष्क का,

भला कैसे में गहन अध्ययन कर पाता ?

तुम्हें तो लगता है , जैसे मेरे पास कोई दिव्य शक्ति है विचारों को पढ़ने की !

अगर शक्ति होती तो मैं साधारण मनुज कहाँ कहलाता ?

खैर ये सब बातें हैं अब इन्हें बातें ही रहने दो |

तुम हो कोई प्रख्यात सुकुमारी जैसी,

तुम रहो आरामदायक , वातगामी अपने नये नये घरों में !

मैं हूँ युद्ध में सब कुछ हार चुके राजा के जैसा ,

मुझे पीड़ानाशक वनवास में सिर झुकाकर अकेले रहने दो !
स्वप्नों की आकांक्षाएं और प्रेम पिपासा!

 ये सब सिर्फ बातें थीं अब उन्हें बातों में ही रहने दो |

Pic credit- https://images.vice.com/vice/images/articles/meta/2015/04/08/i-was-assaulted-on-the-street-but-i-still-walk-home-alone-at-night-408-1428519902.jpg

शुभांकर 

© Confused Thoughts

आप सभी लोगों के अपार स्नेह और उत्साहवर्धन के चलते में व्यस्ततम दिनचर्या से थोड़ा समय लिखने के लिए निकाल पाया हूं ,आशा है आप अपने विचार जरूर देना चाहेंगे !

धन्यावाद!


कच्चे मकान!

​दशक डेढ़ दशकों में कुछ बदलाव मेरे गांव में हुए हैं ,

वो कच्चे मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए हैं !


बदलाव भी बड़ी गज़ब प्रक्रिया है ,

अब देखो!

मकान तो सारे के सारे पक्के हो गए मगर रिश्ते-नाते , विश्वास और मेलजोल ये सब कच्चे हो गए !

कभी खेला करते थे जिस शैतानों की टोली में ,

आज व्यस्त और समझदार वो सब बच्चे हो गए |



कुछ अपनापन सा था उन कच्चे मकानों में,

जो मिला नहीं कभी इन पक्के मकानों में !



वो तंगहाली और ऊपर से घनघोर बरसात ,

घर की कच्ची छत से पानी का रिसाव ,

फिर भी अपनेपन का ना था कोई अभाव!



उस कच्ची छत में गोरैया के अनेकों घोंसले ,

मानो एक कच्चे घर में पूरा मोहल्ला बस गया हो !

दिन भर उनके बच्चों की चहचाहट ,

ऐसे लगता था जैसे सारे मिलकर शैतानियां कर रहे हों |



शाम ढ़लते ही लगता था जैसे दुनिया थम सी गयी हो,

आँगन में बैठकर घर वापसी करते पक्षियों को एकटक निहारना ,

ऐसा प्रतीत होता था ,जैसे वो भी अब आराम की तलब में हैं!

फिर कुछ पहर बाद गूँजता था सन्नाटा|

Img Source – http://images.sncurjanchal.in//2017/04/img-20170420-wa0062-583×330.jpg

मगर आज वो गोरैया कहीं गायब हो गयी ,
आसमान में पक्षियों की कतारें संध्या वेला से नदारद हो गईं!

भले ही उजाला अधिक हो इन बनावटी रोशनियों का ,

मगर शाम वाली वो बात अब गायब हो गयी,

रातें भले ही अब लोगों की चहल पहल से गुलजार हो चली हैं,

बड़ी बैचैन , परायी सी अब ये रातें हो गईं |



मकान कच्चे थे तो क्या हुआ ?

रिश्ते -नाते , चैन सुकून सब पक्के हुआ करते थे !

मेरे गांव के वो मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए ||
शुभांकर 
© Confused Thoughts

मेरी छोटी सी रचना पढ़ने के लिए धन्यवाद ! 

आशा करता हूँ ,आप सभी कुशल मंगल अपने कार्य क्षेत्र में संलग्न होंगे !

इन्हीं शब्दों के साथ अब में विराम लेता हूँ !

सादर प्रणाम , राम – राम 🙏🙏🙏

One-sided lens of my Spectacles

Hello every one,
I hope you all are doing well
, today am going to share my problem, I am facing a problem of myopia since last few years. If you are not aware with this word, then I would like to tell you that Blurry vision in one eye or both eyes may be a symptom of myopia. I went to doctors and they fully checked up my eyes with scanner and they found everything okay also they recommended me to eat healthy foods and vegetables after that I followed up diet plan for 2 months but my problem remained same. Now again I visited eye care center and again doctors scanned my eyes and again they found everything okay, I was totally shocked to know that my eye nerves are totally fit. I returned to home and discussed this problem with some friends of mine, one of them was my closest friend and he recommended me to visit psychologist. I was totally helpless so next day I fixed an appointment with famous psychologist of my city, He asked to me  “so! what’s your problem man?”

“Sir, actually I am facing blurry vision in one side eye” I replied with sad face. Doctor smiled at me and said to me “I am psychologist dude, you are at wrong place. You should visit any eye care center.

“Sir I visited twice but they were failed to find the solution after that one of my close friend recommended me visit psychologist.” I replied.

Doctor was an expert in psychology so he tried to understand my problem and he asked me to explain my whole problem, then I started

“I have a girlfriend and we both are close to each other, I love to touch her, kiss her and love to hold her hand publicly after all she is my property but another side of my eye can’t tolerate if my sister hang out with boys, I can’t bear if anyone try to hold her hand publicly after all she is my sister naa.

In another case, I like to judge everyone by his/her first impression, if someone is showing rudely behavior then I declare him as rude or uneducated, another side of my eye never try to find they actual circumstances of that person. For example – I am travelling in a train or bus, if a girl is shouting on a male passenger then within a minute I declare that person as criminal and start beating him. If a beautiful girl is standing in bus, then I love to offer my seat to her because I support women empowerment but another side of my eye can’t see those senior citizens who are unable to stand on foots. Another side of my eye never view those physically disabled people who are facing the problem during road crossing.

If I discuss about my political views then firstly I would like to labeled me as secular human, I can see the mass mob lynching by my sharp eyes but I don’t to see Bengal riots since 2016. I can see the murder cases of special cast people but another side of my eye never shows the murder cases of high caste people.

I see the mob lynching in India but another side of my eye can’t see the cow robbery and murder of the cow’s honor .I support freedom of speech and another side I can’t see the misuse of freedom of speech.

I say that “Terrorism has no religion ” but I don’t take a single minute to declare Hindu terrorism if a minority is assaulted even I don’t want to understand the whole situation.
As I told I am secular human so I believe in schedule caste empowerment but another side of my eye never support anti reservation system. I love to label the people as liberals, bhakts if someone try to speak actual truth.

My friends always tell me that one side of my eye is showing blurry vision of objects and another side is crystal clear like water so doctor please help me out to overcome this problem”

Psychologist took 5 minutes and said to me “Do you prefer any glass or contact lens? “

“Yes, someone gifted me trendy spectacles and I use to prefer that one when I see the world.”

“Okay! Show me that spectacles” psychologist said.

I took it  out of my pocket and handed him over. 

“Oh, now I see the problem! Congrats Your both side eye lenses are safe! look Your one side glass of spectacles is missing so please stop wearing spectacles if your eyes are already fit and safe. “

-Psychologist said to me 

Img credit – http://l7.alamy.com/zooms/587c57ad10ac4d4492b176aa0da37100/a-pair-of-lost-spectacles-on-street-ajanxa.jpg

From that day, I stopped using spectacles and now my eye visions are so clear.

Moral – Please stop using any types of political or religious one sided spectacles and use your mind for clear vision. Please Don’t see colors, skins, gender, religion or caste just see a human being. If a person is killing someone then he should be labeled as murderer either he is Hindu, either he is Muslim, either he is Cristian. Criminal should be labeled as criminal don’t make it controversial topic by adding the religious spices because majority and minority both have equal rights and they both deserve religious beliefs so please don’t try to give any special treatment for specific one for popularity sake .

Thank you!

Special note – I hope my thoughts would screw up some minds , I can’t help it .

Shubhankar Sharma

© Confused Thoughts