Category Archives: Politics

Reblog- राजनीतिक इश्क़

मैं लाचार सा एक आशिक़ हूँ, हालत मेरी सरकार के भक्तों जैसी है !

अगर याद करूँ वो शुरुआती दिन ,

जैसे किसी चुनावी तैयारी में गुजर रहे थे, रात और दिन |

तब तू रोज मुझसे मिलने आती थी , कसमें वादे रोज़ नए… Read More

Guys Do listen audio version of this poem

 

Shubhankar Thinks

 

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व्यंग:- आखिर दोषी कौन है?

आज विजययदशमी के मौके पर ,

एक व्यंग मेरे दिमाग में अनायास चल रहा है!

पुतला शायद रावण का फूंका जायेगा,

मगर मेरे अंतःकरण में एक रावण जल रहा है|

तर्क-कुतर्क व्यापक हुआ है, हठी, मूढ़ी भी बुद्धिजीवी बना है!

आज दशहरा के मौके पर कोई सीता पक्ष तो,

कोई रावण पक्ष की पैरवी में लगा है|

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आगे पढ़ें…….

 

आप सभी को विजयदशी की हार्दिक शुभकामनायें,

आपको मेरी कविता अच्छी लगी है तो कमेंट करके अपनी प्रतिक्रियाएं अवश्य दें|

Brainwashing : A brain attack

Hello folks,
I hope you all are doing well; Today I am going to share some view on a sensible topic so I hope you will read this article till the end.


So, today’s topic is brainwashing, so firstly let’s know the definition of this word
“pressurize (someone) into adopting radically different beliefs by using systematic and often forcible means.” (source Google)” or

in simple words we can say “Brainwashing is a process which is used to Re-educate someone “

or in other words

In process of brainwashing, A person is convinced by others to adopt the new beliefs and knowledge”.
May be still these explanations are not enough to understand the behavior and effects of brainwash so let’s take an example…….. Read full Post here

Please subscribe my new blog if you are visiting there .

Thanks!

चिंगारी उठी कोई ,जल उठा शहर मेरा!

​चिंगारी उठी कोई फिर ,

छिट पुट सी बातों में जलने लगा शहर मेरा !

ना होश है उन्हें अपनों का , 

ना रहा कोई तेरा मेरा |


किसी ने बीच में जाकर सभी से प्रश्न ये पूछा ?

“क्या यही सिखलाता है मजहब – धर्म तेरा ?”


मचलकर लोग गुस्से में तुनक कर गुमान से बोले 

“ये शुरुआत थी अभी तक कि , हम पूरा जहाँ जला देंगे !”

Jla do

बड़ा विचलित हुआ वो सुनकर फिर भयभीत से कठोर स्वर में बोला –



” ये लो माचिस और ये ईंधन भी ,

जला दो अब ये शहर सारा!

ये घर सारे जला देना,

जला देना वो चौराहा !


वाहन भी जला दो तुम,

दुकानें भी जला देना !

किसी के आशियाने उजाड़ दो तुम,

किसी की रोजगारी जला देना |



जला दो वो शिला लेख सारे,

जिसमें इंसानियत का सबब हो!

जला दो वो तहज़ीब विरासत भी,

जिसमें आदाब-ओ – अदब हो |



वतन परस्ती की इबादतें भी ,

कानूनी हिसाब तुम जला देना !

मानवता सिखाने वाली,

किताबें तुम जला देना|


जलाकर राख कर दो तुम ,

मेरे देशी अरमानों को !

रहे बाकी कुछ जलाने को,

तुम मुझको भी जला देना |



बनेगी राख जब इन सबकी ,

हवा में मिलावटें होंगी!

तुम्हारे इन साफ चेहरों पर ,

कल जब कलिखें होंगी !


भले ही दर्ज ना हो तुमपर कोई आपत्ति अदालत में ,

मगर ऊपर वाले की अदालत में सुनवाईयाँ जरूर होंगी |”


वो खरा इंसान अभी इतना ही बोल पाया ,

उसकी तिरस्कारपूर्ण बातें सुनकर एक चतुर प्राणी चकराया !

पूरे माजरे को समझने में उसने एक मिनट ना लगाया!

फिर भीड़ को चीरकर वो जोरों से चिल्लाया –


ये प्रवचन नहीं दे रहा भक्तों , कर रहा ये हमारी कठोर निन्दा है !

ये पक्का कोई कांग्रेसी है या फिर बीजेपी का कोई नया एजेंडा है|”

इतने सुनने भर की देरी थी बस,

उठी लाठी चली कृपाण तन कर,

फिर टूट पड़े सब उस सज्जन पर!


चिंगारी उठी कोई,

फिर जल उठा शहर सारा|


© ConfusedThoughts

– Shubhankar

Do listen the audio version of this poem.

राम रहीम के समर्थकों से जलता मेरा भारत !

​जला दो तुम मक़ान सारे ,

जला दो तुम शहर सारा,

ना आज का तुमको होश 

ना कल की सोचता है ये मूढ़ बुद्धि दिमाग तुम्हारा!
क्षमा चाहूँगा ये लेख मैं बिना किसी योजना के शुरू कर रहा हूँ ,क्योंकि पिछले ४-५ घंटों से लगातार मेरे अंदर भावनाएं हिलोरे खा रहीं हैं अगर मैंने अब कुछ नहीं लिखा तो मैं खुद में उलझकर रह जाऊँगा!

खैर मुद्दे की बात पर आते हैं , आज डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम उर्फ गुरमीत पर बलात्कार के आरोप सिद्ध हो गए हैं ,जो २००३ में उनकी ही एक शिष्या ने उनपर लगाए थे |

ये फैसला स्वागत के योग्य है इसमें कुछ बड़ी बात नहीं थी क्योंकि न्यायपालिका का उपयोग न्याय के लिए ही होता आया है और आगे भी होगा चाहे वो ट्रिपल तलाक़ की बात हो या फिर रेप के आरोपी को फांसी की सजा की !

मगर अभी कुछ अलग हुआ हरियाणा और दिल्ली में बाबा जी के समर्थकों ने दोपहर से तोड़फोड़ शुरू की थी और अब ये तोड़फोड़ खूनी हिंसा में तब्दील हो चुकी हैं जिसमें अभी तक 17 लोग मर चुके हैं और ४८ लोग बुरी तरह घायल हैं ,ये एक मीडिया रिपोर्ट है जिससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि आंकड़े अनुमानित हैं , असल स्थिति कुछ और भी भयानक होगी |

दिल्ली का आनंद विहार रेलवे और बस स्टैंड दोनों को खंडहर में तब्दील कर चुके हैं ये लोग!
पिछले 2दिन से इंटरनेट सेवा , स्कूल्स, कॉलेजेस सब कुछ बन्द किया हुआ था सिर्फ इसी फैसले की वजह से !मुझे एक बात अभी तक समझ नहीं आयी आखिर इतनी सतर्कता के बावजूद भी लोग बाज नहीं आये और उन्होंने अपना काम पूरे दिल से किया!

खुद को बाबा का समर्थक बताने वाले ये लोग अंधभक्ति में पागल हो चुके हैं कि इनको ना खुदकी फिक्र है ना देश की !

सबसे पहले तो मुझे आश्चर्य है आखिर सरकार सुबह से चुप क्यों है?

अभी तक सेना बुलाकर सीधा फायरिंग शुरू क्यों नहीं कराई ?

क्योंकि मुझे नहीं लगता ये लोग भारत के एक मुख्य नागरिक के हाशिये में आते हैं , जो लोग देश की संपत्ति या फिर लोगों की जान लेने पर तुले हैं ,उनके साथ दुश्मन जैसा व्यवहार होना लाजिमी है |

चाहे वो इंसान मैं हूँ या फिर मेरा कोई सम्बन्धी , सबके साथ समान रूप से व्यवहार होना चाहिए ,क्योंकि जो सैनिक वहां घायल हो रहे हैं वो भी मेरे संबंधी ,भाई या फिर हितेषी हैं जो व्यर्थ के मुद्दे पर अपना लहू बहा रहे हैं|
अब आता हूँ मैं राजनीति के मुद्दे पर , कड़वी बातें मैं कोई आज नई नहीं बोल रहा , मेरे लेख मैं आप हमेशा क्रिटिसिज्म पढ़ते होंगे क्योंकि मैं दुनिया को एक कोने से बैठकर नहीं देखता, मैं देखता हूँ हर एक दिशा से ताकि सच को सच और गलत को गलत बता सकूँ, फिर चाहे किसी को मेरी बात अच्छी लगे या फिर नए विरोधी तैयार हो जाएं मेरी एक बात से |

अभी दो तीन दिन पहले जब ट्रिपल तलाक़ का फैसला आया था तो कुछ पॉलिटिशियन उसे अच्छा बता रहे थे और कुछ इसे धार्मिक दखलंदाजी , असलियत ये है ,कि ना तो उन्हें फैसले से फर्क पड़ता है ना ही धर्म से !

ये वो लोग हैं जो इंसान की चमड़ी बेचकर भी पैसा कमा सकते हैं , आज के फैसले पर किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई क्योंकि इसमें अनुसूचित जाति, मुस्लिम या फिर धर्म जैसा कोई मजेदार पहलू नहीं था , अब आप ही बताओ अगर मजेदार मुद्दा नहीं होगा तो ये लोग क्यों दिलचस्पी लेने लगे !

रेप होना तो बहुत साधारण है इनके लिए वरना ये मुद्दा तो २००३ में ही सुलझ चुका होता , अब जब कोई मैदान नहीं होगा तो ये लोग खेलने नहीं जाएंगे |
आपको याद ही होगा जाट आंदोलन में भी खूब नौटंकी हुई थी, क्योंकि वहां खट्टर की सरकार है तो विपक्ष को भी दंगा कराने में मजा आया था |

आखिर ऐसे ही मौके की तो तलाश होती है उनको कब हाथ सेंकने को मिले और हमारी पूर्ण बहुमत वाली केंद्र सरकार को खुदपर इतना भी भरोसा नहीं है कि एक सख्त निर्णय बिना किसी बैठक के ले सके !

ये लोग सलाह मश्विराह में इतना समय लगा देते हैं तब तक विध्वंस हो चुका होता है|

आखिर रणनीति राजनीति के खिलाड़ी जो ठहरे , बिना किसी प्रयोजन के ये कदम नहीं उठा सकते |
अब बात करते हैं अंधभक्तों की , आप लोग अपने उज्ज्वल भविष्य और उन्नति के लिए किसी बाबा या साधु की शरण में जाते हैं और उसे भगवान घोषित भी कर देते हैं !

अक्ल बेच खाई है क्या बेवकूफों?

श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि प्रत्येक जीव के अंदर एक आत्मा निवास करती है जिसका संबंध सीधे परमात्मा से है|

इसका मतलब ये हुआ कि आपका सीधा संपर्क परमात्मा से है तो फिर आप लोग सीधी बात खुदसे नहीं कर पाते क्या ?उसके लिए किसी के तलवे चाटने की आवश्यकता क्या है?

जो भी मांगना है खुदसे मांगों , भगवान ने आपको इतना समर्थ बनाया है कि आप खुदका भाग्य लिख सकते हो फिर क्यों आपको किसी चमत्कार करिश्मा की खोज रहती है ?

आप खुद एक चमत्कार हो जो कर्म से कुछ भी संभव कर सकता है फिर क्यों आप लोग अपने कर्म छोड़कर इस आडम्बर में स्वांग रचने जाते हो !

मैं बाबा और संत जनों का हृदय से सम्मान करता हूँ अगर वो संत धर्म और ज्ञान का प्रचार प्रसार करे और सदभावना का संदेश फैलाये , अगर वो खुदको चमत्कारी या फिर भगवान घोषित करता है तो उसे ढोंगी बोलने में कोई हर्ज नहीं है|

गुरु का काम अंधकार को मिटाकर उजाला लाना है , अपने अंधभक्त बनाना नहीं है !

आप लोग अगर इतने ही जोशीले हो और धर्म को मानने वाले हो तो 

तब आप लोग कहाँ चले जाते हो जब एक निर्दोष की हत्या करके गुंडे चले जाते हैं , जब एक निर्धन परिवार की महिलाओं के साथ दुराचार होता है या फिर सड़क चलती लड़कियों को कुछ मनचले रोज चौराहे पर छेड़ते हैं ,तब ये भीड़ आक्रोश सब कहाँ चला जाता है !

क्या आपका धर्म इस विषय मे कोई संदेश नहीं देता ?

क्या दुराचार धर्म के प्रतिकूल नहीं है क्या ?

मेरा विश्वास मानो मैं अहिंसा वादी नहीं हूं , अगर ये लोग एक रेपिस्ट या फिर हत्यारे को भीड़ जुटाकर मारते तो मैं इसे नृशंसय हत्या करार बिल्कुल नहीं दिया उल्टा मन ही मन शाबासी देता क्योंकि ऐसे सख्त कदम से हजार लोग और भी खुदको सुधार लेते !

मगर नहीं ऐसे मुद्दों पर ये भीड़ गुम हो जाती है , तब कोई उत्पाती निकलकर नहीं आता !

खैर मेरे हाथ थक गए हैं लिखते लिखते !

अब मैं कलम को विराम देता हूँ !

मुझे उत्सुकता से प्रतीक्षा है आपके विचारों की तो अपने विचार इस विषय पर जरूर दें !

धन्यवाद !

© Confused Thoughts

Shubhankar (स्वतंत्र कलम से निष्पक्ष विचार)

One-sided lens of my Spectacles

Hello every one,
I hope you all are doing well
, today am going to share my problem, I am facing a problem of myopia since last few years. If you are not aware with this word, then I would like to tell you that Blurry vision in one eye or both eyes may be a symptom of myopia. I went to doctors and they fully checked up my eyes with scanner and they found everything okay also they recommended me to eat healthy foods and vegetables after that I followed up diet plan for 2 months but my problem remained same. Now again I visited eye care center and again doctors scanned my eyes and again they found everything okay, I was totally shocked to know that my eye nerves are totally fit. I returned to home and discussed this problem with some friends of mine, one of them was my closest friend and he recommended me to visit psychologist. I was totally helpless so next day I fixed an appointment with famous psychologist of my city, He asked to me  “so! what’s your problem man?”

“Sir, actually I am facing blurry vision in one side eye” I replied with sad face. Doctor smiled at me and said to me “I am psychologist dude, you are at wrong place. You should visit any eye care center.

“Sir I visited twice but they were failed to find the solution after that one of my close friend recommended me visit psychologist.” I replied.

Doctor was an expert in psychology so he tried to understand my problem and he asked me to explain my whole problem, then I started

“I have a girlfriend and we both are close to each other, I love to touch her, kiss her and love to hold her hand publicly after all she is my property but another side of my eye can’t tolerate if my sister hang out with boys, I can’t bear if anyone try to hold her hand publicly after all she is my sister naa.

In another case, I like to judge everyone by his/her first impression, if someone is showing rudely behavior then I declare him as rude or uneducated, another side of my eye never try to find they actual circumstances of that person. For example – I am travelling in a train or bus, if a girl is shouting on a male passenger then within a minute I declare that person as criminal and start beating him. If a beautiful girl is standing in bus, then I love to offer my seat to her because I support women empowerment but another side of my eye can’t see those senior citizens who are unable to stand on foots. Another side of my eye never view those physically disabled people who are facing the problem during road crossing.

If I discuss about my political views then firstly I would like to labeled me as secular human, I can see the mass mob lynching by my sharp eyes but I don’t to see Bengal riots since 2016. I can see the murder cases of special cast people but another side of my eye never shows the murder cases of high caste people.

I see the mob lynching in India but another side of my eye can’t see the cow robbery and murder of the cow’s honor .I support freedom of speech and another side I can’t see the misuse of freedom of speech.

I say that “Terrorism has no religion ” but I don’t take a single minute to declare Hindu terrorism if a minority is assaulted even I don’t want to understand the whole situation.
As I told I am secular human so I believe in schedule caste empowerment but another side of my eye never support anti reservation system. I love to label the people as liberals, bhakts if someone try to speak actual truth.

My friends always tell me that one side of my eye is showing blurry vision of objects and another side is crystal clear like water so doctor please help me out to overcome this problem”

Psychologist took 5 minutes and said to me “Do you prefer any glass or contact lens? “

“Yes, someone gifted me trendy spectacles and I use to prefer that one when I see the world.”

“Okay! Show me that spectacles” psychologist said.

I took it  out of my pocket and handed him over. 

“Oh, now I see the problem! Congrats Your both side eye lenses are safe! look Your one side glass of spectacles is missing so please stop wearing spectacles if your eyes are already fit and safe. “

-Psychologist said to me 

Img credit – http://l7.alamy.com/zooms/587c57ad10ac4d4492b176aa0da37100/a-pair-of-lost-spectacles-on-street-ajanxa.jpg

From that day, I stopped using spectacles and now my eye visions are so clear.

Moral – Please stop using any types of political or religious one sided spectacles and use your mind for clear vision. Please Don’t see colors, skins, gender, religion or caste just see a human being. If a person is killing someone then he should be labeled as murderer either he is Hindu, either he is Muslim, either he is Cristian. Criminal should be labeled as criminal don’t make it controversial topic by adding the religious spices because majority and minority both have equal rights and they both deserve religious beliefs so please don’t try to give any special treatment for specific one for popularity sake .

Thank you!

Special note – I hope my thoughts would screw up some minds , I can’t help it .

Shubhankar Sharma

© Confused Thoughts
 

बदलते भारत की तस्वीर

नमस्कार दोस्तो,

काफी दिनों बाद आपसे कुछ बात करने का मन हुआ है , हमेशा कविताएं लिखता हूँ , मगर कुछ बातें सीधे आप सबके समक्ष रख सकूँ इसलिए आज कोई कविता नहीं लिखूंगा !

जैसा कि आपने शीर्षक पढ़ा होगा तो आपमें से बहुत लोगों को लग रहा होगा कि मैं  भी मोदी जी के तीन साल के काम गिनाने जा रहा हूँ |नहीं ऐसा कुछ नहीं है! अगर अपने देश के विकास की बात करनी होती तो मैं इंग्लिश में लिखता ताकि विदेशी लोग भी हमारे विकास को देखें और भारत को जानें !

आज कुछ ऐसी बातें हैं जो घर परिवार में ही करनी चाहिए क्योंकि पड़ौसी जानेंगे तो उन्हें मजाक बनाने के लिए बढ़ावा मिलेगा|

खैर मुद्दे की बात पर आता हूँ अब ! रोज हम खबरों में रेप की खबरें पढ़ते हैं , कल मैंने भी ऐसा कुछ पढ़ा जिससे मुझे बहुत सारे विचार आये|

वो विचार चरम पर थे मगर कल मैं कुछ नहीं लिख पाया क्योंकि कल आज मेरा एग्जाम था तो सोचा अब लिखूं वो सब बातें |

कल मेरा कुछ और लिखने का मन था मगर आज कुछ और लिखने जा रहा हूँ, हमारे १२५ करोड़ की आबादी वाले देश में,

हम टेक्नोलॉजी में इतने आगे बढ़े हैं कि रुपये का दाम कम होने के बावजूद हमारे यहां की IT  कम्पनीज विदेशों को कमाई के मामले में टक्कर दे रही हैं, आज भारत में लगभग हर युवा के पास स्मार्टफोन है ,फिर चाहे वो युवा कोई अमीर बाप का बेटा है या फिर वो कबाड़ा बीनने वाला बस्ती का बच्चा ! हमारी जीडीपी आज कई बड़े देशों से ऊपर जा रही है| मगर अफसोस की बात है साहब तरक़्क़ी हमने सिर्फ टेक्नोलॉजी में की है ,मानसिकता हमारे भारत की आज भी गहरी खाई में पड़ी है |

१२५ करोड़ की आबादी वाले भारत में आज जब किसी के साथ गैंग रेप होता है तो

 समाज में उसे छुपाया जाता है , 

कानून में उसे तारीखों में बढ़ाया जाता है !

राजनीति में उसे भुनाया जाता है ,

युवाओं में उसे सोशल मीडिया का मुद्दा बनाया जाता है |

Img- http://timesofindia.indiatimes.com/thumb/msid-57240710,width-400,resizemode-4/57240710.jpg

 चारों दृष्टिकोण की बातें मैं आपसे करूँगा ,

तो सबसे पहले आते हैं समाज पर –

ये वही समाज है, जो सड़क पर चीखती हुई लड़की की तरफ से मुंह फेर कर बगल से निकल लेते हैं और बाद में यही लोग लोक लाज की बातें बनाते हैं|

ये वही समाज है ,जहां छुपकर सेक्स करना और रिश्तों को शर्मसार करना , महिलाओं को गंदी नज़र से देखना ये सब जायज़ है क्योंकि छुपकर करते हैं ना! बस वहीं उस रेप पीड़िता को दोषी नजरों से देखेंगे खुद तो कुछ करेंगे नहीं, उसके घर वालों को भी कानून की मदद लेने से रोकेंगे |

ये वही समाज है जहां १०-२० गर्लफ्रैंड /बॉयफ्रेंड रखने के बावजूद अंत में घर वालों की पसंद लड़के /लड़की से शादी करने वाले इंसान को शरीफ इज्जतदार समझा जाता है और एक प्रेमी जोड़े को पहले प्यार में पड़ने के बाद शादी कर लेने से उन्हें दोषी , निर्लज़्ज़ समझा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जाति में शादी नहीं की, या फिर घर वालों की पसंद से शादी नहीं की !

अब आते हैं कानून की बात पर तो आप सबको पता है पुलिस वाले भी इंसान हैं कोई जीपीएस सिस्टम नहीं जो सब कुछ देख रहे हैं और सेकण्ड्स में घटना स्थल पर पहुंच जाएं |और बाद की कार्यवाही आपको पता है ! मानवाधिकार , कोर्ट कचहरी और तारीखें अब इसके लिए आप संविधान को दोष दें या फिर खुद अपने आप को |

राजनीति पर आने से पहले, मैं युवाओं की बातें करना चाहूँगा क्योंकि किसी भी देश की रीढ़ होता है युवा !

हमारे भारत का युवा आज इतना जागरूक है कि वो हर खबर पर अपने विचार देता है |पूरे आईपीएल हम लोग टीवी पर ऐसे डटे रहते हैं ,जैसे सीमा पर जवान ! फिर चाहे वो मोदी भक्त युवा हो या केजरी भक्त सब अपने अपने नेता की तारीफों के पुल बांधते हैं |ट्विटर,एफबी व्हाट्सएप्प ये सब अड्डे हैं हमारे कोई भी खबर सेकण्ड्स में वायरल ! फिर चाहे सीरिया में लोग मारे गए हों या सेना का जवान शहीद हो हम लोग तुरंत रिप लिखकर दुख जाहिर करते हैं |स्नैपचैट को आइना दिखाना हो या फिर मूवीज को बैन कराना हो ,हम सब एकजुट होकर अपनी देशभक्ति प्रदर्शित करते हैं| खैर ये सब सोशल दुनिया की बातें थीं जिसमें सोशल जैसा लेश मात्र भी कुछ नहीं है| असल जिंदगी में हम माँ बाप को भी समय नहीं देते , हमारे पास सोशल वर्क करने के लिए समय नहीं होता मगर कुछ युवा हैं जो धर्म के लिए हत्या तक कर देते हैं , कुछ युवा हैं जो आरक्षण के लिए सब तहस नहस कर देते हैं ,हाँ! कुछ युवा हैं, जो अपने धर्म को बढाने के लिए दिन रात एक कर देते हैं तो मेरा एक सवाल है उनसे और सोशल मीडिया यूज़र्स से ,

आप लोग एक रेप होने के बाद कहाँ चले जाते हो ?

तब आपकी उग्रता , जोश कहाँ जाता है तब तो कभी आप कोशिश नहीं करते आरोपियों को दंड देने की !

तब क्यों आप पुलिस का मुंह देखते हो ?

और अगर संविधान को इतना ही मानते हो तो जाती धर्म के लिए क्यों संविधान की बातों को नहीं मानते |

खैर अब आते हैं राजनीति पर ,

आपको एक उदाहरण दूंगा अपनी बात को समझाने के लिए !

मानो दुर्भाग्यवश कोई रेप की घटना घटी देश के किसी कोने में तो उसे राजनीतिक तौर पर किन नजरियों से देखा जाएगा

सबसे पहले पता लगाओ वो घटना गांव में घटी है या फिर किसी बड़े शहर में , अगर गांव में तो उसे दबा दिया जाए एक दो दिन में और अगर शहर में घटी है तो न्यूज़ हेडलाइंस में चढ़ाओ और पता लगाओ राज्य कौन सा है? अगर बिहार है तो लालू नीतीश को दोष दो सारे राजनेता और अगर उत्तर प्रदेश है तो अखिलेश या फिर अब योगी को निशाना बनाओ अगर दिल्ली है तो मोदी को कोसो सारे के सारे !

हाँ एक बात तो भूल ही गया , 

धर्म जाति का पता तो लगाया नहीं आपने !

देखो वो जाट है या ठाकुर, पंडित, दलित या फिर मुसलमान कौन है वो ?

अगर दलित है या फिर मुस्लिम है तो गाड़ियां रवाना करो , अब दो चार दिन उन्हीं के घरों पर रोटियां सेंकनी हैं और अगर वो दलित या मुस्लिम नहीं हैं तो मरने दो सालों को !

असलियत में किसी से भी हमदर्दी नहीं है , उन्हें ना न्याय से मतलब उन्हें बस अपने पॉइंट्स बढ़ाने हैं वोट बैंक के मार्किट में !

देश में सेक्युलरिज्म बढ़ गया है ,लोग कट्टरवादी हो गए हैं ! धार्मिक स्वतंत्रता नहीं रही !

ये सब राजनेताओं के भाषण हैं जिन्हें ऎसी कार में घूमने के अलावा कोई और काम नहीं है |

उनसे ये पूछो धर्म जात के आधार पर आप लोगों ने बांटा हुआ है !दंगे , कट्टरता सब आप फैलाते हो और हमें ही बता रहे हो कि भारत में सेक्युलर लोग हैं |

इसके लिए किसी ने खूब शेर मारा था , 

“सियासतें आवाम पर क्या खूब अहसान करती हैं,

पहले आंखें छीन लेती है फिर एनकें दान करती है |”

बस आज के लिए इतना ही अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहा हूँ !

रेप के बाद कुछ ऐसी स्थिति होती है !यही है बदलते भारत की तस्वीर , मैं कोई सलाह या ज्ञान नहीं बांटने आया क्योंकि सभी समझदार लोग हैं , सभी सोशल मीडिया यूज करते हैं !

तो फिर ये रेपिस्ट कौन हैं? किसी और दुनिया से आते हैं क्या ये लोग ?

इसलिए मैं कोई ज्ञान नहीं दूंगा क्योंकि सोशल मीडिया पर बोलने से कोई बदलाव नहीं आएगा अगर करना है तो प्लीज सोशल मीडिया में से सोशल और मीडिया दोनों को अलग कर दो !फर्क समझो इनमें , शायद तभी कुछ हो पायेगा|

खैर अब मैं शब्दों लो विराम देता हूँ ,मेरा मकसद सिर्फ आप लोगों से सीधे दिल की बात करने का था तभी आज मैं काफी दिनों बाद यहां आया अब मेरे एग्जाम खत्म हो गए हैं!

आप सभी लोग कैसे हैं , कमेंट के माध्यम से सभी अपने विचार जरूर देना! क्योंकि ये मेरा कोई व्याख्यान नहीं था, ये मेरे अपने विचार थे और मैं आप सबके विचार भी जानना चाहूँगा |

धन्यवाद!

©Confused Thoughts