मेरी माँ

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जन्म वगरह का तो कुछ याद नहीं कुछ ,

आपने भी बाकी सबकी तरह मेरे लिए दर्द सहा होगा !

हाँ उन दिनों को याद करके, मुझे आज भी हंसी आती है! जब मुझे जबरदस्ती पकड़कर दाल पिलाई जाती थी |

जो मुझे तब बिल्कुल पसंद नहीं थी |

शब्द ज्ञान , मात्रा , लेख सब कुछ सिखाया था,

अगर गलती करो तो डाँट भी लगाई जाती थी !

और जब मेरा दाखिला हुआ तो

रोज शाम को स्कूल से नाम कटाने की जिद्द करना ,

और फिर सुबह आपका मुझे तैयार करके फिर से स्कूल भेज देना !

ये क्रम लगातार चला!
मुझे आज भी याद है |

उसी का परिणाम है कि आज मैं कुछ लिखने लायक हुआ हूँ !

उस डाँट, जबरदस्ती और लगातार सुधारने का महत्व अब मैं भी समझ गया हूँ |

मेरी छोटी छोटी सफलता पर मुझसे भी ज्यादा खुश होना ,

हरेक बार मेरा आपकी बातों से प्रेरित होना!

और जब मेरी परीक्षाएं चलती थी रात रात को मुझसे भी बाद में सोना ,

और फिर मुझसे भी जल्दी जाग कर मेरे लिए नाश्ता बनाने के लिए खड़े होना|
ये त्याग आपने बिना शिकायत करे किया !

मेरी असफलताओं पर कभी प्रश्न नहीं किया , 
पुराना भुलाकर,आगे अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित किया !

बाकी सबके माँ बाप की तरह उम्मीदों का बोझ नहीं रखा कभी ,

मेरी असफलता के बावजूद भी आपके चेहरे पर क्रोध का भाव नहीं दिखा कभी !

मेरे जरा से बीमार होने पर 

आप आज भी व्याकुल हो जाती हो ,

खुद की छोटी बड़ी परेशानियों को बड़ी चालाकी से छुपाती हो!

मेरे हर निर्णय , हर एक कदम पर साथ देना ,

कोई भी नया कार्य करने से पहले और बढ़ावा देना !

ये सब आदतों में शुमार है आपके |
अभी आपके लिए कुछ कर नहीं पाया हूँ,

तो इसलिए झूठे वंचनो को में क्या कहूंगा !

हाँ भविष्य में ऐसा कुछ कर पाऊँ ,

ऐसी अभिलाषाएं में खुद से रखूंगा |

–  शिवा



©Confused Thoughts

please check out our channel and listen this poem in my voice – https://youtu.be/BE8aWHd1fN4

 

Happy Mother’s day

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

जैसा आपने पिछले पत्र में पढा था कि प्रेमिका रूठकर व्यंगपूर्ण पत्र लिखती है और जब यह पत्र उसके प्रेमी को मिलता है तो वो अपनी प्रेमिका को मनाने और भरोसा दिलाने के मकसद से पत्र का प्रेमपूर्ण जवाब लिखता है मगर मस्तिष्क में चलते गणित के कारण कैसे उसके विचार पत्र के माध्यम से निकलते हैं पढ़िए –

IMG source – http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg


प्रेमी  अपनी प्रेमिका से –

प्रेमिका मेरी ओ प्राण प्यारी!

तुम्हे एक पल हृदय से ना दूर किया है ,

तुम्हारा और मेरा संग तो रसायन विज्ञान में जल बनाने की प्रक्रिया है !

जैसे हाइड्रोजन नहीं छोड़ सकती ऑक्सीजन का संग,

भगवान ने ऐसा रचा है ,हमारा प्रेम प्रसंग|



दुविधा सुनो मेरा क्या हाल हुआ है,

पूरा समय गति के समीकरणों में उलझ गया है !

कभी बल लगाकर पढ़ाई की दिशा में बढ़ता हूँ,

कभी तुम्हारे प्रेम की क्रिया प्रतिक्रिया से पीछे तुम्हारी दिशा में खींचता हूँ|


मेरे विचारों का पाई ग्राफ उलझ जाता है ,

ये Tan@  के मान की तरह कभी ऋणात्मक अनंत तो कभी धनात्मक अनंत तक जाता है !

मेरे ग्राफ रूपी जीवन में सारे मान अस्थिर हैं ,

मगर तुम्हर स्थान मेरे हृदय में पाई(π) के मान की तरह स्थिर है|



मेरे दिन की व्यस्तता लघुत्तम समपवर्त्य (H.C.F )  जैसी है ,

मेरे कॉलेज का समय भाजक(Divisor) की तरह पूरे दिन रूपी भाज्य(Dividend) समय को बड़े भागफल(Quotient) से विभाजित करता है !

और फिर वो शेषफल भाजक का रूप धारण कर लेता है ,

बस यही प्रक्रिया अंत तक चलती है !

जब तक शेषफल(Remainder) रूपी समय शून्य ना हो जाये,

अब बताओ ऐसे में पत्र लिखने का समय कहाँ से लायें|



तुम्हारी यादें मेरे लिए गुणांक(Coefficient) के जैसी हैं ,

जो दिन प्रतिदिन मेरे प्रेम को ,

गुणनफल(Resultant) के रूप में कई गुणा वर्धित करती हैं !

तुम्हारे अलावा किसी और लड़की के बारे में सोच भी नहीं सकता ,

क्योंकि तुम्हारे अलावा बाकी सबकी छवि मेरे विशाल मान रूपी हृदय में दशमलव के बाद आने वाले तीन बिंदुओं जैसी है |



हमारा अलगाव , भटकाव सब काल्पनिक मान हैं ,

जो हमारे प्रेम रूपी वास्तविक मान के आगे कहीं नहीं रह जाता !

ये सब मोह माया मुझे कितना भी भ्रमित करें ,

मगर तुम्हारे शून्य रूपी शक्तिशाली प्रेम से विभाजित होकर सब शून्य में मिल जाता है |



.

परिस्थितियों ने मुझमें से तुम्हें घटाकर ये सोचा कि प्रेम का मान कम हो जाएगा !

मगर परिस्थितियों को हमारे बारे में अभी पता ही क्या है ?

शून्य को घटा लो चाहे जोड़ लो कितना भी !

हमारे प्रेम का मान तो फिर भी वही स्थिर(Unchanged) आएगा |


अब मैं अपने शब्दों को विश्राम देता हूँ,

अपने गणित के सिद्धांतों को विराम देता हूँ |


प्रेम पत्र-1

©Confused Thoughts

अपने महत्वपूर्ण विचार देना ना भूलें !

धन्यवाद !

प्रेम पत्र-1

 एक प्रेमिका का प्रेमी  को    पत्र-

 

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एक प्रेमी युगल उच्च शिक्षा के लिए एक दूसरे से बिछड़ जाता है !

प्रेमिका ने पास के ही एक कॉलेज में BA  में दाखिला लिया है और प्रेमी को दूसरे शहर इसलिए जाना पड़ता है क्योंकि पास के कॉलेज में B.Sc Mathmetics नहीं थी |अब दोनों को गए आधा वर्ष बीत गया इस बीच दोनों की ना कोई बात हुई ,ना कोई मिलाप हुआ !

आखिर होता भी कैसे उस जमाने में ना फोन होते थे ना ही यातायात इतना अच्छा था , होते थे तो सिर्फ पत्र !जिनसे लोग खूब सारे विचार एक बार में भेज देते थे फिर महीनों बाद पत्र का जवाब आता था और कभी कभी तो वो पत्र रास्ते में गुम हो जाता !

खैर मुद्दे पर आते हैं , हुआ ये की प्रेमी ने कोई पत्र नहीं लिखा वो पढ़ाई में इतना व्यस्त था और नए शहर में तालमेल बनाने में उसका सारा समय निकल जाता था ,अब ऐसे में प्रेमिका गुस्से में आकर एक पत्र भेजती है तो पढ़िए मैंने उस काल्पनिक पत्र को कविता के रूप में लिखा है !


प्रेमी मेरे ,ओ प्राण प्यारे!

तुम्हारी प्राण-प्यारी तुम्हें पुकारे,

छः मास बीत गए अब ,

प्रतीक्षा में नयन अश्रुमय हो गए हैं अब !

आओगे या नहीं भी आओगे,

कुविचारों से तन-मन भयभीत भये अब|

 

सांसारिक सुख सब बेस्वाद हो गए हैं ,

मेरे चहकते विचार अब अवसाद ग्रसित हुए हैं !

अब रौनकें नहीं हैं बगीचे में तुम बिन,

कोयल की मधुर ध्वनि भी कर्कश लगती है तुम बिन |

वो आम के पेड़ों पर बौर नहीं आयी इस बार !

शायद तुम्हारे जाने से नाराज हैं ,

या फिर ये हो ऋतुओं का प्रभाव !

 

अब सांयकाल में छत पर सन्नाटा रहता है ,

मैं गयी थी दो तीन दिन लगातार!

जब तुम मुझे वहां दूर वाली छत पर दिखाई नहीं देते ,

तो अब मैंने जाना ही बंद कर दिया |

विरह मेरे जीवन में कृष्ण पक्ष की काली अंधेरी रात की तरह छा गया है !

मेरी आँखों में तो जैसे किसी समुद्र का सैलाब आ गया है |

 

तुम बिसार दिए हो और प्रेम भी नहीं करते मुझे अब शायद!

पढ़ाई में इतने तल्लीन हुए हो ,

या फिर मेरी कोई सौतन मिल गयी है अब तुम्हें शायद|

तुम भूल गए वो सर्दियों के दिन !

जब बर्फ़ीली ठंडी हवाओं के बावजूद,

हम दोनों अपनी अपनी छत से एक दूसरे को इतनी दूर से निहारते थे!

तुम भूल गए वो पुराने दिन,

जब बाग से खट्टे आम चुराकर तुम मेरे लिए लाते थे |

ध्यान है ना !वो दिन जब तुम्हारे स्कूल की छुट्टी के इंतेजार में,

मैं पूरे एक घन्टे वहाँ चौराहे पर खड़ी रहती थी !

फिर हम दोनों साथ में पूरे रास्ते अपनी अपनी साईकल चलाते हुए बात करते – करते घर जाते थे |

 

 

मगर अब तुम्हें इन सब बातों की कोई चिंता नहीं है!

तभी आज तक चिट्ठी ना कोई संदेश आया ?

ना ये सोचा कि तुम बिन मेरी दशा कैसी है?

तुम्हारे मन में ना तनिक भी ये   ख्याल आया |

जरूर तुम्हें अब कुछ ना याद होगा ,

मुझसे तनिक भी प्रेम रहा ना होगा|



तो कैसे हैं आप लोग , जैसा कि आपको पता होगा मैं काफी समय से गायब हूँ और आगे भी कुछ समय तक व्यस्त रहूँगा ,आप सभी अपने विचार देना ना भूलें और इसका अगला भाग मैं schedule कर दूंगा और आप सभी आपके कमैंट्स का जवाब थोड़ा देर में दे पाउँगा !

धन्यवाद

शुभ रात्रि

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