सपने क्या होते हैं?

​सपने क्या होते हैं?

अगर शाम ढले बेफ़िक्र होकर ,

लजीज़ खाना खाकर,

पंखा कूलर या फिर ऐसी की ठंडी हवा में ,

मख़मली से आराम गद्दों पर,

बड़े चैन की नींद सो जाते हो आप!

तो क्या खाक सपने देखोगे आप?


सपने वो होते हैं जो रातों की नींदें उड़ा दें,

चैन सुकून को तुम्हारा दुश्मन बता दें,

और इस शांत से दिमाग में कोलाहल मचा दें|



सपने वो नहीं जिन्हें सुबह आंखें खुलते ही भूल जाओ,

सपने वो हैं जिन्हें रात को आंखें मूँदने के बाद भी ना भूल पाओ!

Pic credit – https://pixabay.com/photo-2037255/


सपने वो नहीं जिसमें ऐश- ओ -आराम हो,

मस्त सी जिंदगी चले परेशानी का कोई नाम ना हो !

सपने वो हैं जिसमें आराम हराम हो,

तुम इन रफ्तार रोकने वाली रातों से भी परेशान हो|



वो सपने भी क्या सपने हुए?

जो बड़ी आसानी से मिल जाएं,

करना कुछ भी पड़े नहीं और सब कुछ बना बनाया मिल जाये !

सपने तो वो हैं जो पग पग पर तुम्हें सताएं,

चुनौतियों से तुम्हें और मजबूत बनाएं|



सपने देखो मगर देखभाल के देखो,

कुछ अपने भीतर खंगाल के देखो!

फिर मिल जायेंगे वो सपने तुम्हें भी,

जो आंखों से तुम्हारी नींदें छीन लेंगे|



© Confused Thoughts

– Shubhankar


कैसे हो आप सभी लोग ?

अब ब्लॉग पर आना काफी कम हो गया है मेरा फिर भी मेरी कोशिश रहती है कि आप सभी के पोस्ट ज्यादा से ज्यादा पढूँ , अगर फिर भी भूलवश कोई ब्लॉग छूट जाता है तो आप कमेंट में मुझे याद दिला सकते हैं ताकि मैं आपकी मूल्यवान रचनाएं पढ़ने से वंचित ना रह जाऊं!

धन्यवाद !

नमस्कार,प्रणाम !

 

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

​विस्फोटकों के डर से,

सेना हटती नहीं हमारी!

Indian Bloggers

अरि दल की  साजिशों से ,

गति रुकती नहीं हमारी!

अवशेष ,संस्कृति से ,

दृष्टि हटती नहीं हमारी !

अपवाद बंदिशों से ,

छवि डिगती नहीं हमारी !

कुछ खास है हममें ,

की हस्ती मिटती नहीं हमारी !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||



आदर्श देख इसके 

लोग सुदूर से आते हैं ,

विचार देख इसके,

चकित रह जाते हैं!

सत्कार देख यहां का,

वो यहीं  बस जाते हैं !

आलोचकों के इरादे सब ,

धरे के धरे रह जाते हैं ||



कोशिश हजार कर लो ,

बंदिश लगा के धर लो !

कसमें लगा लो जितनी ,

ताकत लगा लो जितनी !

मुँह एक साथ खोलेंगे ,

फिर एक स्वर में बोलेंगे –

“आसानी से मिटा दोगे,

हस्ती इतनी छोटी नहीं हमारी !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा” ||



कितने भी जाति , धर्म 

और प्रान्त बना लो ,

छल-प्रपंच सारे तुम लगा लो !

सब अपने अपने गुट बना लो ,

फिर सज्जनों में फूट डालो!

चाहे धर्म की तुम लड़ाईयां लड़ा लो ,

फिर हवाओं में जादू डोलेगा,

देशप्रेम का अमृत घोलेगा !

हर युवा शान से बोलेगा –

“सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा” ||



स्वतंत्रता के रंग में,

ध्वज देख कर गगन में !

सीना  गर्व से चौड़ता है ,

रक्तचाप तेजी से दौड़ता है!

रेशे चढ़ जाते हैं मेरे ,

कलाइयों और हाथों के!

ह्रदय तेज से धड़कता है,

हर एक अंग फडकता !

और मन कामनाओं में डूबा

की यहाँ जन्म हो दोबारा ,

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||



भूतल  के  अंक में  ,

गढ़ा है तिरंगा प्यारा !

समतल से प्रांगण में ,

रहे स्वाभिमान हमारा !

उन्नति के प्रयास हों ,

ये ध्येय रहे हमारा !

हस्ती यूं हीं जीवित रहे ,

उद्देश्य ये हमारा !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||

जय हिंद, जय भारत !


आप मेरी इस कविता को मेरी आवाज में सुनना ना भूलें 

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©Confused Thoughts

शुभांकर

ये थोड़ा बेवकूफाना है मगर आप अपने विचार इस लिंक पर दे सकते हैं 😀