शहरी गर्मी

​ये कविता उस स्थिति के बारे में लिखी गयी है|

जब किसी नौकरी की तलाश में कोई बेरोजगार नौजवान युवा गांव से शहर का रुख करता है तो गर्मी में उसका हाल कुछ ऐसा हो जाता है-

IMG credit- https://commons.wikimedia.org/wiki/File:A_view_of_Road_Traffic_Chandagaur_to_New_Delhi_India_Highways.jpg


गर्म मौसम और शहर का तापमान स्तर,

यहां होता है माहौल औरों से इतर!

लू के थपेड़ों से जलता बदन,

काल के गाल में समा जाती है

वो मदमस्त पवन !

वो सड़कों से उड़ती तेज  धूल ,

जैसे

कोई चुभा रहा कोई गर्म शूल!

आँखें पथरा गयी हैं 

मंजिल की तलब में ,

सब जगह घूम रहा हूँ 

मैं बेमतलब में!

प्यास के मारे गला सूख गया है,

पानी का ना कोई अता पता है!

प्रदूषण की कालिख चेहरे पे लग रही है,

आज आसमान से भी मानो आग बरस रही है!

जहाँ नीम पीपल के वृक्ष थे,

वहां अब मकान खड़े हैं !



जो 2-4 पेड़ भाग्यवश बच गए थे ,

आज वो भी बिल्कुल शांत खड़े हैं!

कुछ कीकड के पेड़ बेज़ार खड़े हैं,

लोग तो उसकी बनावटी छाँव में भी लगातार खड़े हैं!

आँखें टोह रहीं हैं मंजिल की तलाश,

सुबह से नहीं मिला सही दिशा में निकास!

राहों की पहेली उलझती जा रही है,

हर एक गली के बाद एक जैसी गली आ रही है|

ऐसे भटकते भटकते सुबह से हो गयी है अब शाम ,

शाम को भी नहीं मिल पाता वो गांव जैसा आराम!

सुबह होते ही फिर वही रफ्तार भरनी है मुझे,

इस शहरी जिंदगी ने उलझा लिया है मुझे!

धूप में पिघलती सड़कों से दोस्ती कर ली है मैंने,

शहरी गर्मी की आदत डाल ली है मैंने|

©Confused Thoughts

ऑनर किलिंग!

​ऑनर किलिंग की घटनाएं हमारे देश में आये दिन होती रहती हैं, जिसके बाद के दृश्य को मैंने अपनी कविता के माध्यम से प्रदर्शित किया है|

यह कविता लड़की के बाप के ऊपर आधारित है ,जिसमें लड़की का बाप अपनी बेटी सहित उस लड़के की हत्या कर देता है |

आरोप सिद्ध होने के बाद उसे जेल होते है और घर वापस आकर कुछ इस तरह से व्यथित होता है –

होती अगर जीवित वो आज,

तो आँगन में मेरे भी चहचाहट करती वो !

इस गांव में ना सही कहीं दूर दूसरे शहर में रह लेती,

कम से कम इसी दुनिया में तो रहती वो |

प्यार किया था या कोई गुनाह किया था,

खुद अपने हाथों से मार दिया मैंने,

अपनी लाड़ली बेटी को|
ये समाज , धर्म-जाति सब कुछ दिखावे में आता है,

ना धन है मेरे पास ना कोई रोजी रोटी का अता पता है!
उस दिन मुझे उकसाने को हजारों का महकमा खड़ा था,

मेरी अक्ल पर ना जाने क्या पत्थर पड़ा था!
अपने घर की रोशनी को अंधेर में बदल दिया,

साथ में किसी दूसरे के घर के चिराग को भी दुनिया से ओझल कर दिया |
क्या पाया मैंने?
अपने घर की हँसती खेलती हस्ती को मिटा दिया ,

साथ में किसी दूसरे के घर में भी मातम बिछा दिया|
पड़ौसी,कौम,कुछ गांव वाले!

ये लोग कौन से दूध के धुले थे,

इनके चिट्ठे पिटारे सब खुले हुए थे!

मति मारी गयी थी मेरी उस रात,

सुलह करके भी हो बन सकती थी बात|
हाँ!मेरी जाति का नहीं था वो ,

मगर हांड,माँस, खून से बना , 

मेरी ही तरह इंसान था वो!
मेरी ही तरह रोटी,सब्जी खाता था,

किसी दूसरे ग्रह का प्राणि नहीं था वो!
समाज में प्रतिष्ठा की ही तो बात थी,

या फिर सब लोकलाज के डर की करामात थी!

मगर आज तो नहीं कोई सम्मान मेरा ,

उड़नछू हो गया सब मायावी गुमान मेरा!
याद करता हूँ तो समझ आता है ,

ना प्रतिष्ठा में दम था , 

ना मेरे कर्मो में कोई खास बात थी!

समय वो था जब मेरे ऊपर लक्ष्मी की बरसात थी|

आज निर्धनता और घर अकाल पड़ा है,

मेरे पास ना  कोई सगा सम्बन्धी, ना दोस्त बंधु खड़ा है!

अपनी हरी भरी बगिया को अपने हाथों उजाड़ दिया मैंने,

कुदरत के बनाये अनोखे खेल को अपनी दिखावट में बिगाड़ दिया मैंने!

इस समाज, धर्म के मुद्दे सब निपटा ही लेता मैं,

कल मुमकिन नहीं था मगर आज उसे अपना ही लेता मैं!

मेरे घर नहीं तो किसी दूर शहर में वो होती,

मेरे दिल में खुशी और मन को तसल्ली होती|


©Confused Thoughts
कैसे हैं आप सभी लोग?

कमेंट में बताना ना भूलें !

आपसे क्षमा चाहूँगा इतने दिनों से गायब था और आगे भी गायब रहूँगा उसके लिए अतिरिक्त क्षमा चाहता हूँ|

कॉलेज , कोचिंग, एग्जाम सारे बहाने अब खत्म हो चुके हैं इसलिए इस बार कोई बहाना नहीं बता रहा |

बदलते भारत की तस्वीर

नमस्कार दोस्तो,

काफी दिनों बाद आपसे कुछ बात करने का मन हुआ है , हमेशा कविताएं लिखता हूँ , मगर कुछ बातें सीधे आप सबके समक्ष रख सकूँ इसलिए आज कोई कविता नहीं लिखूंगा !

जैसा कि आपने शीर्षक पढ़ा होगा तो आपमें से बहुत लोगों को लग रहा होगा कि मैं  भी मोदी जी के तीन साल के काम गिनाने जा रहा हूँ |नहीं ऐसा कुछ नहीं है! अगर अपने देश के विकास की बात करनी होती तो मैं इंग्लिश में लिखता ताकि विदेशी लोग भी हमारे विकास को देखें और भारत को जानें !

आज कुछ ऐसी बातें हैं जो घर परिवार में ही करनी चाहिए क्योंकि पड़ौसी जानेंगे तो उन्हें मजाक बनाने के लिए बढ़ावा मिलेगा|

खैर मुद्दे की बात पर आता हूँ अब ! रोज हम खबरों में रेप की खबरें पढ़ते हैं , कल मैंने भी ऐसा कुछ पढ़ा जिससे मुझे बहुत सारे विचार आये|

वो विचार चरम पर थे मगर कल मैं कुछ नहीं लिख पाया क्योंकि कल आज मेरा एग्जाम था तो सोचा अब लिखूं वो सब बातें |

कल मेरा कुछ और लिखने का मन था मगर आज कुछ और लिखने जा रहा हूँ, हमारे १२५ करोड़ की आबादी वाले देश में,

हम टेक्नोलॉजी में इतने आगे बढ़े हैं कि रुपये का दाम कम होने के बावजूद हमारे यहां की IT  कम्पनीज विदेशों को कमाई के मामले में टक्कर दे रही हैं, आज भारत में लगभग हर युवा के पास स्मार्टफोन है ,फिर चाहे वो युवा कोई अमीर बाप का बेटा है या फिर वो कबाड़ा बीनने वाला बस्ती का बच्चा ! हमारी जीडीपी आज कई बड़े देशों से ऊपर जा रही है| मगर अफसोस की बात है साहब तरक़्क़ी हमने सिर्फ टेक्नोलॉजी में की है ,मानसिकता हमारे भारत की आज भी गहरी खाई में पड़ी है |

१२५ करोड़ की आबादी वाले भारत में आज जब किसी के साथ गैंग रेप होता है तो

 समाज में उसे छुपाया जाता है , 

कानून में उसे तारीखों में बढ़ाया जाता है !

राजनीति में उसे भुनाया जाता है ,

युवाओं में उसे सोशल मीडिया का मुद्दा बनाया जाता है |

Img- http://timesofindia.indiatimes.com/thumb/msid-57240710,width-400,resizemode-4/57240710.jpg

 चारों दृष्टिकोण की बातें मैं आपसे करूँगा ,

तो सबसे पहले आते हैं समाज पर –

ये वही समाज है, जो सड़क पर चीखती हुई लड़की की तरफ से मुंह फेर कर बगल से निकल लेते हैं और बाद में यही लोग लोक लाज की बातें बनाते हैं|

ये वही समाज है ,जहां छुपकर सेक्स करना और रिश्तों को शर्मसार करना , महिलाओं को गंदी नज़र से देखना ये सब जायज़ है क्योंकि छुपकर करते हैं ना! बस वहीं उस रेप पीड़िता को दोषी नजरों से देखेंगे खुद तो कुछ करेंगे नहीं, उसके घर वालों को भी कानून की मदद लेने से रोकेंगे |

ये वही समाज है जहां १०-२० गर्लफ्रैंड /बॉयफ्रेंड रखने के बावजूद अंत में घर वालों की पसंद लड़के /लड़की से शादी करने वाले इंसान को शरीफ इज्जतदार समझा जाता है और एक प्रेमी जोड़े को पहले प्यार में पड़ने के बाद शादी कर लेने से उन्हें दोषी , निर्लज़्ज़ समझा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जाति में शादी नहीं की, या फिर घर वालों की पसंद से शादी नहीं की !

अब आते हैं कानून की बात पर तो आप सबको पता है पुलिस वाले भी इंसान हैं कोई जीपीएस सिस्टम नहीं जो सब कुछ देख रहे हैं और सेकण्ड्स में घटना स्थल पर पहुंच जाएं |और बाद की कार्यवाही आपको पता है ! मानवाधिकार , कोर्ट कचहरी और तारीखें अब इसके लिए आप संविधान को दोष दें या फिर खुद अपने आप को |

राजनीति पर आने से पहले, मैं युवाओं की बातें करना चाहूँगा क्योंकि किसी भी देश की रीढ़ होता है युवा !

हमारे भारत का युवा आज इतना जागरूक है कि वो हर खबर पर अपने विचार देता है |पूरे आईपीएल हम लोग टीवी पर ऐसे डटे रहते हैं ,जैसे सीमा पर जवान ! फिर चाहे वो मोदी भक्त युवा हो या केजरी भक्त सब अपने अपने नेता की तारीफों के पुल बांधते हैं |ट्विटर,एफबी व्हाट्सएप्प ये सब अड्डे हैं हमारे कोई भी खबर सेकण्ड्स में वायरल ! फिर चाहे सीरिया में लोग मारे गए हों या सेना का जवान शहीद हो हम लोग तुरंत रिप लिखकर दुख जाहिर करते हैं |स्नैपचैट को आइना दिखाना हो या फिर मूवीज को बैन कराना हो ,हम सब एकजुट होकर अपनी देशभक्ति प्रदर्शित करते हैं| खैर ये सब सोशल दुनिया की बातें थीं जिसमें सोशल जैसा लेश मात्र भी कुछ नहीं है| असल जिंदगी में हम माँ बाप को भी समय नहीं देते , हमारे पास सोशल वर्क करने के लिए समय नहीं होता मगर कुछ युवा हैं जो धर्म के लिए हत्या तक कर देते हैं , कुछ युवा हैं जो आरक्षण के लिए सब तहस नहस कर देते हैं ,हाँ! कुछ युवा हैं, जो अपने धर्म को बढाने के लिए दिन रात एक कर देते हैं तो मेरा एक सवाल है उनसे और सोशल मीडिया यूज़र्स से ,

आप लोग एक रेप होने के बाद कहाँ चले जाते हो ?

तब आपकी उग्रता , जोश कहाँ जाता है तब तो कभी आप कोशिश नहीं करते आरोपियों को दंड देने की !

तब क्यों आप पुलिस का मुंह देखते हो ?

और अगर संविधान को इतना ही मानते हो तो जाती धर्म के लिए क्यों संविधान की बातों को नहीं मानते |

खैर अब आते हैं राजनीति पर ,

आपको एक उदाहरण दूंगा अपनी बात को समझाने के लिए !

मानो दुर्भाग्यवश कोई रेप की घटना घटी देश के किसी कोने में तो उसे राजनीतिक तौर पर किन नजरियों से देखा जाएगा

सबसे पहले पता लगाओ वो घटना गांव में घटी है या फिर किसी बड़े शहर में , अगर गांव में तो उसे दबा दिया जाए एक दो दिन में और अगर शहर में घटी है तो न्यूज़ हेडलाइंस में चढ़ाओ और पता लगाओ राज्य कौन सा है? अगर बिहार है तो लालू नीतीश को दोष दो सारे राजनेता और अगर उत्तर प्रदेश है तो अखिलेश या फिर अब योगी को निशाना बनाओ अगर दिल्ली है तो मोदी को कोसो सारे के सारे !

हाँ एक बात तो भूल ही गया , 

धर्म जाति का पता तो लगाया नहीं आपने !

देखो वो जाट है या ठाकुर, पंडित, दलित या फिर मुसलमान कौन है वो ?

अगर दलित है या फिर मुस्लिम है तो गाड़ियां रवाना करो , अब दो चार दिन उन्हीं के घरों पर रोटियां सेंकनी हैं और अगर वो दलित या मुस्लिम नहीं हैं तो मरने दो सालों को !

असलियत में किसी से भी हमदर्दी नहीं है , उन्हें ना न्याय से मतलब उन्हें बस अपने पॉइंट्स बढ़ाने हैं वोट बैंक के मार्किट में !

देश में सेक्युलरिज्म बढ़ गया है ,लोग कट्टरवादी हो गए हैं ! धार्मिक स्वतंत्रता नहीं रही !

ये सब राजनेताओं के भाषण हैं जिन्हें ऎसी कार में घूमने के अलावा कोई और काम नहीं है |

उनसे ये पूछो धर्म जात के आधार पर आप लोगों ने बांटा हुआ है !दंगे , कट्टरता सब आप फैलाते हो और हमें ही बता रहे हो कि भारत में सेक्युलर लोग हैं |

इसके लिए किसी ने खूब शेर मारा था , 

“सियासतें आवाम पर क्या खूब अहसान करती हैं,

पहले आंखें छीन लेती है फिर एनकें दान करती है |”

बस आज के लिए इतना ही अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहा हूँ !

रेप के बाद कुछ ऐसी स्थिति होती है !यही है बदलते भारत की तस्वीर , मैं कोई सलाह या ज्ञान नहीं बांटने आया क्योंकि सभी समझदार लोग हैं , सभी सोशल मीडिया यूज करते हैं !

तो फिर ये रेपिस्ट कौन हैं? किसी और दुनिया से आते हैं क्या ये लोग ?

इसलिए मैं कोई ज्ञान नहीं दूंगा क्योंकि सोशल मीडिया पर बोलने से कोई बदलाव नहीं आएगा अगर करना है तो प्लीज सोशल मीडिया में से सोशल और मीडिया दोनों को अलग कर दो !फर्क समझो इनमें , शायद तभी कुछ हो पायेगा|

खैर अब मैं शब्दों लो विराम देता हूँ ,मेरा मकसद सिर्फ आप लोगों से सीधे दिल की बात करने का था तभी आज मैं काफी दिनों बाद यहां आया अब मेरे एग्जाम खत्म हो गए हैं!

आप सभी लोग कैसे हैं , कमेंट के माध्यम से सभी अपने विचार जरूर देना! क्योंकि ये मेरा कोई व्याख्यान नहीं था, ये मेरे अपने विचार थे और मैं आप सबके विचार भी जानना चाहूँगा |

धन्यवाद!

©Confused Thoughts

मेरी माँ

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जन्म वगरह का तो कुछ याद नहीं कुछ ,

आपने भी बाकी सबकी तरह मेरे लिए दर्द सहा होगा !

हाँ उन दिनों को याद करके, मुझे आज भी हंसी आती है! जब मुझे जबरदस्ती पकड़कर दाल पिलाई जाती थी |

जो मुझे तब बिल्कुल पसंद नहीं थी |

शब्द ज्ञान , मात्रा , लेख सब कुछ सिखाया था,

अगर गलती करो तो डाँट भी लगाई जाती थी !

और जब मेरा दाखिला हुआ तो

रोज शाम को स्कूल से नाम कटाने की जिद्द करना ,

और फिर सुबह आपका मुझे तैयार करके फिर से स्कूल भेज देना !

ये क्रम लगातार चला!
मुझे आज भी याद है |

उसी का परिणाम है कि आज मैं कुछ लिखने लायक हुआ हूँ !

उस डाँट, जबरदस्ती और लगातार सुधारने का महत्व अब मैं भी समझ गया हूँ |

मेरी छोटी छोटी सफलता पर मुझसे भी ज्यादा खुश होना ,

हरेक बार मेरा आपकी बातों से प्रेरित होना!

और जब मेरी परीक्षाएं चलती थी रात रात को मुझसे भी बाद में सोना ,

और फिर मुझसे भी जल्दी जाग कर मेरे लिए नाश्ता बनाने के लिए खड़े होना|
ये त्याग आपने बिना शिकायत करे किया !

मेरी असफलताओं पर कभी प्रश्न नहीं किया , 
पुराना भुलाकर,आगे अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित किया !

बाकी सबके माँ बाप की तरह उम्मीदों का बोझ नहीं रखा कभी ,

मेरी असफलता के बावजूद भी आपके चेहरे पर क्रोध का भाव नहीं दिखा कभी !

मेरे जरा से बीमार होने पर 

आप आज भी व्याकुल हो जाती हो ,

खुद की छोटी बड़ी परेशानियों को बड़ी चालाकी से छुपाती हो!

मेरे हर निर्णय , हर एक कदम पर साथ देना ,

कोई भी नया कार्य करने से पहले और बढ़ावा देना !

ये सब आदतों में शुमार है आपके |
अभी आपके लिए कुछ कर नहीं पाया हूँ,

तो इसलिए झूठे वंचनो को में क्या कहूंगा !

हाँ भविष्य में ऐसा कुछ कर पाऊँ ,

ऐसी अभिलाषाएं में खुद से रखूंगा |

–  शिवा



©Confused Thoughts

please check out our channel and listen this poem in my voice – https://youtu.be/BE8aWHd1fN4

 

Happy Mother’s day

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

जैसा आपने पिछले पत्र में पढा था कि प्रेमिका रूठकर व्यंगपूर्ण पत्र लिखती है और जब यह पत्र उसके प्रेमी को मिलता है तो वो अपनी प्रेमिका को मनाने और भरोसा दिलाने के मकसद से पत्र का प्रेमपूर्ण जवाब लिखता है मगर मस्तिष्क में चलते गणित के कारण कैसे उसके विचार पत्र के माध्यम से निकलते हैं पढ़िए –

IMG source – http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg


प्रेमी  अपनी प्रेमिका से –

प्रेमिका मेरी ओ प्राण प्यारी!

तुम्हे एक पल हृदय से ना दूर किया है ,

तुम्हारा और मेरा संग तो रसायन विज्ञान में जल बनाने की प्रक्रिया है !

जैसे हाइड्रोजन नहीं छोड़ सकती ऑक्सीजन का संग,

भगवान ने ऐसा रचा है ,हमारा प्रेम प्रसंग|



दुविधा सुनो मेरा क्या हाल हुआ है,

पूरा समय गति के समीकरणों में उलझ गया है !

कभी बल लगाकर पढ़ाई की दिशा में बढ़ता हूँ,

कभी तुम्हारे प्रेम की क्रिया प्रतिक्रिया से पीछे तुम्हारी दिशा में खींचता हूँ|


मेरे विचारों का पाई ग्राफ उलझ जाता है ,

ये Tan@  के मान की तरह कभी ऋणात्मक अनंत तो कभी धनात्मक अनंत तक जाता है !

मेरे ग्राफ रूपी जीवन में सारे मान अस्थिर हैं ,

मगर तुम्हर स्थान मेरे हृदय में पाई(π) के मान की तरह स्थिर है|



मेरे दिन की व्यस्तता लघुत्तम समपवर्त्य (H.C.F )  जैसी है ,

मेरे कॉलेज का समय भाजक(Divisor) की तरह पूरे दिन रूपी भाज्य(Dividend) समय को बड़े भागफल(Quotient) से विभाजित करता है !

और फिर वो शेषफल भाजक का रूप धारण कर लेता है ,

बस यही प्रक्रिया अंत तक चलती है !

जब तक शेषफल(Remainder) रूपी समय शून्य ना हो जाये,

अब बताओ ऐसे में पत्र लिखने का समय कहाँ से लायें|



तुम्हारी यादें मेरे लिए गुणांक(Coefficient) के जैसी हैं ,

जो दिन प्रतिदिन मेरे प्रेम को ,

गुणनफल(Resultant) के रूप में कई गुणा वर्धित करती हैं !

तुम्हारे अलावा किसी और लड़की के बारे में सोच भी नहीं सकता ,

क्योंकि तुम्हारे अलावा बाकी सबकी छवि मेरे विशाल मान रूपी हृदय में दशमलव के बाद आने वाले तीन बिंदुओं जैसी है |



हमारा अलगाव , भटकाव सब काल्पनिक मान हैं ,

जो हमारे प्रेम रूपी वास्तविक मान के आगे कहीं नहीं रह जाता !

ये सब मोह माया मुझे कितना भी भ्रमित करें ,

मगर तुम्हारे शून्य रूपी शक्तिशाली प्रेम से विभाजित होकर सब शून्य में मिल जाता है |



.

परिस्थितियों ने मुझमें से तुम्हें घटाकर ये सोचा कि प्रेम का मान कम हो जाएगा !

मगर परिस्थितियों को हमारे बारे में अभी पता ही क्या है ?

शून्य को घटा लो चाहे जोड़ लो कितना भी !

हमारे प्रेम का मान तो फिर भी वही स्थिर(Unchanged) आएगा |


अब मैं अपने शब्दों को विश्राम देता हूँ,

अपने गणित के सिद्धांतों को विराम देता हूँ |


प्रेम पत्र-1

©Confused Thoughts

अपने महत्वपूर्ण विचार देना ना भूलें !

धन्यवाद !

प्रेम पत्र-1

 एक प्रेमिका का प्रेमी  को    पत्र-

 

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एक प्रेमी युगल उच्च शिक्षा के लिए एक दूसरे से बिछड़ जाता है !

प्रेमिका ने पास के ही एक कॉलेज में BA  में दाखिला लिया है और प्रेमी को दूसरे शहर इसलिए जाना पड़ता है क्योंकि पास के कॉलेज में B.Sc Mathmetics नहीं थी |अब दोनों को गए आधा वर्ष बीत गया इस बीच दोनों की ना कोई बात हुई ,ना कोई मिलाप हुआ !

आखिर होता भी कैसे उस जमाने में ना फोन होते थे ना ही यातायात इतना अच्छा था , होते थे तो सिर्फ पत्र !जिनसे लोग खूब सारे विचार एक बार में भेज देते थे फिर महीनों बाद पत्र का जवाब आता था और कभी कभी तो वो पत्र रास्ते में गुम हो जाता !

खैर मुद्दे पर आते हैं , हुआ ये की प्रेमी ने कोई पत्र नहीं लिखा वो पढ़ाई में इतना व्यस्त था और नए शहर में तालमेल बनाने में उसका सारा समय निकल जाता था ,अब ऐसे में प्रेमिका गुस्से में आकर एक पत्र भेजती है तो पढ़िए मैंने उस काल्पनिक पत्र को कविता के रूप में लिखा है !


प्रेमी मेरे ,ओ प्राण प्यारे!

तुम्हारी प्राण-प्यारी तुम्हें पुकारे,

छः मास बीत गए अब ,

प्रतीक्षा में नयन अश्रुमय हो गए हैं अब !

आओगे या नहीं भी आओगे,

कुविचारों से तन-मन भयभीत भये अब|

 

सांसारिक सुख सब बेस्वाद हो गए हैं ,

मेरे चहकते विचार अब अवसाद ग्रसित हुए हैं !

अब रौनकें नहीं हैं बगीचे में तुम बिन,

कोयल की मधुर ध्वनि भी कर्कश लगती है तुम बिन |

वो आम के पेड़ों पर बौर नहीं आयी इस बार !

शायद तुम्हारे जाने से नाराज हैं ,

या फिर ये हो ऋतुओं का प्रभाव !

 

अब सांयकाल में छत पर सन्नाटा रहता है ,

मैं गयी थी दो तीन दिन लगातार!

जब तुम मुझे वहां दूर वाली छत पर दिखाई नहीं देते ,

तो अब मैंने जाना ही बंद कर दिया |

विरह मेरे जीवन में कृष्ण पक्ष की काली अंधेरी रात की तरह छा गया है !

मेरी आँखों में तो जैसे किसी समुद्र का सैलाब आ गया है |

 

तुम बिसार दिए हो और प्रेम भी नहीं करते मुझे अब शायद!

पढ़ाई में इतने तल्लीन हुए हो ,

या फिर मेरी कोई सौतन मिल गयी है अब तुम्हें शायद|

तुम भूल गए वो सर्दियों के दिन !

जब बर्फ़ीली ठंडी हवाओं के बावजूद,

हम दोनों अपनी अपनी छत से एक दूसरे को इतनी दूर से निहारते थे!

तुम भूल गए वो पुराने दिन,

जब बाग से खट्टे आम चुराकर तुम मेरे लिए लाते थे |

ध्यान है ना !वो दिन जब तुम्हारे स्कूल की छुट्टी के इंतेजार में,

मैं पूरे एक घन्टे वहाँ चौराहे पर खड़ी रहती थी !

फिर हम दोनों साथ में पूरे रास्ते अपनी अपनी साईकल चलाते हुए बात करते – करते घर जाते थे |

 

 

मगर अब तुम्हें इन सब बातों की कोई चिंता नहीं है!

तभी आज तक चिट्ठी ना कोई संदेश आया ?

ना ये सोचा कि तुम बिन मेरी दशा कैसी है?

तुम्हारे मन में ना तनिक भी ये   ख्याल आया |

जरूर तुम्हें अब कुछ ना याद होगा ,

मुझसे तनिक भी प्रेम रहा ना होगा|



तो कैसे हैं आप लोग , जैसा कि आपको पता होगा मैं काफी समय से गायब हूँ और आगे भी कुछ समय तक व्यस्त रहूँगा ,आप सभी अपने विचार देना ना भूलें और इसका अगला भाग मैं schedule कर दूंगा और आप सभी आपके कमैंट्स का जवाब थोड़ा देर में दे पाउँगा !

धन्यवाद

शुभ रात्रि

© Confused Thoughts

हिंसक-अहिंसा

अभी जैसा आप सबको पता है देश में एक गंभीर समस्या चल रही है , उस समस्या का अभी तक कोई समाधान नही मिल पा रहा

रोज हम अखबारों में सैनिकों के शहीद होने की खबर पढ़ते हैं ऐसी खबर पढ़कर मेरे अंदर बहुत उथल पुथल होती है समझ नहीं आ रहा आखिर ये रुकने का नाम क्यों नहीं ले रहा उसी व्यथा को मैंने कुछ शब्दों के माध्यम से लिखा है शायद कुछ लोगों को आपत्ति भी हो मेरे शब्दों पर मगर क्षमा चाहूँगा स्पष्टवादी हूँ –



बड़े शौक से लोग पढ़ते हैं और नसीहत देते हैं 

शांतिप्रियता मनुष्यता का प्रमाण है !

ऐसे शांति पक्षधरों को आज स्पष्ट शब्दों में बोलूंगा 

राजनीति , कूटनीति , इतिहास सारे पन्ने खोलूंगा !
खैर राजनीति तो कल परसों की कहानी है 

मगर सिंधु घाटी की ये सभ्यता तो वर्षों पुरानी है 

जब जब शांति की शरण में कोई गया था

तब तब उसकी उसकी हस्ती को शत्रु निगल कर गया था!

एक बार गौर करो इतिहास पर ऐसी अनेकों कहानी हैं !

तुम खोलो तो सही महाभारत  का विवरण

वो पांडवों के शांति प्रस्ताव का प्रकरण 

दुर्योधन समस्त राज हथियाने चला था 

भगवान कृष्ण को भी बंदी बनाने चला था !



इतिहास पढो तुम चक्रवर्ती सम्राट का 

जो खेल खेलता था शत्रुओं के विनाश का 

सुदूर देश की क्या मजाल जो आँख उठाकर भारत की तरफ देख सके 

किसी के क़दमों में साहस नहीं था जो सीमा में घुस सके 

किंतु अंत किसी ने ना जाना 

जब अशोक ने शांति का दामन थामा 

मगर परिणाम देखकर आपको होगा अचरज 

गृहयुद्ध , क्षीणता , अधिपत्य और कमजोर वंशज 

फिर ना बना सका कोई एक क्षत्र शासक !

शांति के दूतों का जब हुआ था भारतवर्ष में आगमन 

तब हमें क्या मिला ?

600 वर्षों तक मुगल अत्याचार फिर २०० वर्षों तक अंग्रेजी गुलामी का शासन!

मुझे नहीं पता आप हिंसक हो या फिर अहिंसावादी हो 

या फिर मेरी तरह विचारवादी हो 

मगर कैसे भुला सकते हो नेहरू और गाँधी को 

मैं बहस बिल्कुल नहीं करूंगा स्वतंत्रता दिलाने में योगदान किसका अधिक था !



मगर ये जरूर है 

अहिंसा का प्रयोग उस समय 

मौलिक से ज्यादा भौतिक था !

तब अहिंसा अगर कुछ दिन चुपचाप गहरी नींद सोती 

तब भारत में इतनी ना हिंसा होती 

और आज की स्थिति ना इतनी  गंभीर होती !

वहां सीमा पर देश का जवान शहीद होता है 

और वो राजनीतिक महकमा चैन की नींद सीता है 

कभी सीमा पर कभी सीमा के भीतर रोज मर रहे हैं हम 

पड़ौसी मुल्क से तो क्या निपटेंगे 

खुद अपने ही देश में जाने किससे डर रहे हैं हम ?

शस्त्र , सेना , गोला बारूद का भंडार है 

माँ भारती की कृपा से धन धान्य भी अपार है 

उसके बावजूद भी शत्रु रोज घर में घुसकर घुसपैठ कर रहे हैं 

हम अभी भी ना जाने किस घड़ी का इंतजार कर रहे हैं !

मैं शांतिप्रिय छवि अब उतारने को बोलूंगा 

हिंसक बनकर दहाड़ने को बोलूंगा !



©Confused Thoughts


 

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