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व्यंग:- आखिर दोषी कौन है?

आज विजययदशमी के मौके पर ,

एक व्यंग मेरे दिमाग में अनायास चल रहा है!

पुतला शायद रावण का फूंका जायेगा,

मगर मेरे अंतःकरण में एक रावण जल रहा है|

तर्क-कुतर्क व्यापक हुआ है, हठी, मूढ़ी भी बुद्धिजीवी बना है!

आज दशहरा के मौके पर कोई सीता पक्ष तो,

कोई रावण पक्ष की पैरवी में लगा है|

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आगे पढ़ें…….

 

आप सभी को विजयदशी की हार्दिक शुभकामनायें,

आपको मेरी कविता अच्छी लगी है तो कमेंट करके अपनी प्रतिक्रियाएं अवश्य दें|

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We are 500+ now ! IBA2017

Hey , How are you all?

follower

Hope you all are doing great, I just got notification from WP that my blog has been completed 500 followers believe me when I started blogging that time this number was just a dream but now this is for real because of your warm love and support.

Thanks for reading my blogs and giving me such motivational comments which always push me to write more and more, due to busy schedule, I am not writing regularly, but still I am trying to write at least one post on every weekend as well as I try to read maximum posts as much as possible but still I missed plenty numbers of good posts, I am really sorry if I missed your wonderful article/poetry, I hope soon I could start blogging on a regular basis.

And one more thing you can post your blog/post link in the comment box if you are beginner like me so that I could read your new blog.I would like to clarify a few points, I hope you will take it positively– .

1- I am sorry if I ever made any candid discussion with you or you faced unvarnished comment.

2- Please never play like, follow the game, please be honest to WordPress.

3- If you are liking 10-20 posts within a minute it means you are not reading any single post as well as you are hurting the emotions of a writer.

4- Please be honest to every writer/blogger, if you are ignoring someone’s mistakes, that means you are not giving him/her a chance to improve. Please try to keep the standards and integrity of literature.

5- At last, I am sorry!Please forgive me if I am being rude and moody.Ping me by giving a comment if I haven’t followed your blog (especially for new bloggers).

Keep supporting , Love you all .

Note – Guys I have been nominated my blog for #IBA2017 so they are asking for reader testimonials/comments so please don’t forget to give positive lovely honest reviews in the fb comment plugin (Please click on fb comment button and submit testimonial ).

 

.

Thanks for reading till the end .

चिंगारी उठी कोई ,जल उठा शहर मेरा!

​चिंगारी उठी कोई फिर ,

छिट पुट सी बातों में जलने लगा शहर मेरा !

ना होश है उन्हें अपनों का , 

ना रहा कोई तेरा मेरा |


किसी ने बीच में जाकर सभी से प्रश्न ये पूछा ?

“क्या यही सिखलाता है मजहब – धर्म तेरा ?”


मचलकर लोग गुस्से में तुनक कर गुमान से बोले 

“ये शुरुआत थी अभी तक कि , हम पूरा जहाँ जला देंगे !”

Jla do

बड़ा विचलित हुआ वो सुनकर फिर भयभीत से कठोर स्वर में बोला –



” ये लो माचिस और ये ईंधन भी ,

जला दो अब ये शहर सारा!

ये घर सारे जला देना,

जला देना वो चौराहा !


वाहन भी जला दो तुम,

दुकानें भी जला देना !

किसी के आशियाने उजाड़ दो तुम,

किसी की रोजगारी जला देना |



जला दो वो शिला लेख सारे,

जिसमें इंसानियत का सबब हो!

जला दो वो तहज़ीब विरासत भी,

जिसमें आदाब-ओ – अदब हो |



वतन परस्ती की इबादतें भी ,

कानूनी हिसाब तुम जला देना !

मानवता सिखाने वाली,

किताबें तुम जला देना|


जलाकर राख कर दो तुम ,

मेरे देशी अरमानों को !

रहे बाकी कुछ जलाने को,

तुम मुझको भी जला देना |



बनेगी राख जब इन सबकी ,

हवा में मिलावटें होंगी!

तुम्हारे इन साफ चेहरों पर ,

कल जब कलिखें होंगी !


भले ही दर्ज ना हो तुमपर कोई आपत्ति अदालत में ,

मगर ऊपर वाले की अदालत में सुनवाईयाँ जरूर होंगी |”


वो खरा इंसान अभी इतना ही बोल पाया ,

उसकी तिरस्कारपूर्ण बातें सुनकर एक चतुर प्राणी चकराया !

पूरे माजरे को समझने में उसने एक मिनट ना लगाया!

फिर भीड़ को चीरकर वो जोरों से चिल्लाया –


ये प्रवचन नहीं दे रहा भक्तों , कर रहा ये हमारी कठोर निन्दा है !

ये पक्का कोई कांग्रेसी है या फिर बीजेपी का कोई नया एजेंडा है|”

इतने सुनने भर की देरी थी बस,

उठी लाठी चली कृपाण तन कर,

फिर टूट पड़े सब उस सज्जन पर!


चिंगारी उठी कोई,

फिर जल उठा शहर सारा|


© ConfusedThoughts

– Shubhankar

Do listen the audio version of this poem.

राम रहीम के समर्थकों से जलता मेरा भारत !

​जला दो तुम मक़ान सारे ,

जला दो तुम शहर सारा,

ना आज का तुमको होश 

ना कल की सोचता है ये मूढ़ बुद्धि दिमाग तुम्हारा!
क्षमा चाहूँगा ये लेख मैं बिना किसी योजना के शुरू कर रहा हूँ ,क्योंकि पिछले ४-५ घंटों से लगातार मेरे अंदर भावनाएं हिलोरे खा रहीं हैं अगर मैंने अब कुछ नहीं लिखा तो मैं खुद में उलझकर रह जाऊँगा!

खैर मुद्दे की बात पर आते हैं , आज डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम उर्फ गुरमीत पर बलात्कार के आरोप सिद्ध हो गए हैं ,जो २००३ में उनकी ही एक शिष्या ने उनपर लगाए थे |

ये फैसला स्वागत के योग्य है इसमें कुछ बड़ी बात नहीं थी क्योंकि न्यायपालिका का उपयोग न्याय के लिए ही होता आया है और आगे भी होगा चाहे वो ट्रिपल तलाक़ की बात हो या फिर रेप के आरोपी को फांसी की सजा की !

मगर अभी कुछ अलग हुआ हरियाणा और दिल्ली में बाबा जी के समर्थकों ने दोपहर से तोड़फोड़ शुरू की थी और अब ये तोड़फोड़ खूनी हिंसा में तब्दील हो चुकी हैं जिसमें अभी तक 17 लोग मर चुके हैं और ४८ लोग बुरी तरह घायल हैं ,ये एक मीडिया रिपोर्ट है जिससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि आंकड़े अनुमानित हैं , असल स्थिति कुछ और भी भयानक होगी |

दिल्ली का आनंद विहार रेलवे और बस स्टैंड दोनों को खंडहर में तब्दील कर चुके हैं ये लोग!
पिछले 2दिन से इंटरनेट सेवा , स्कूल्स, कॉलेजेस सब कुछ बन्द किया हुआ था सिर्फ इसी फैसले की वजह से !मुझे एक बात अभी तक समझ नहीं आयी आखिर इतनी सतर्कता के बावजूद भी लोग बाज नहीं आये और उन्होंने अपना काम पूरे दिल से किया!

खुद को बाबा का समर्थक बताने वाले ये लोग अंधभक्ति में पागल हो चुके हैं कि इनको ना खुदकी फिक्र है ना देश की !

सबसे पहले तो मुझे आश्चर्य है आखिर सरकार सुबह से चुप क्यों है?

अभी तक सेना बुलाकर सीधा फायरिंग शुरू क्यों नहीं कराई ?

क्योंकि मुझे नहीं लगता ये लोग भारत के एक मुख्य नागरिक के हाशिये में आते हैं , जो लोग देश की संपत्ति या फिर लोगों की जान लेने पर तुले हैं ,उनके साथ दुश्मन जैसा व्यवहार होना लाजिमी है |

चाहे वो इंसान मैं हूँ या फिर मेरा कोई सम्बन्धी , सबके साथ समान रूप से व्यवहार होना चाहिए ,क्योंकि जो सैनिक वहां घायल हो रहे हैं वो भी मेरे संबंधी ,भाई या फिर हितेषी हैं जो व्यर्थ के मुद्दे पर अपना लहू बहा रहे हैं|
अब आता हूँ मैं राजनीति के मुद्दे पर , कड़वी बातें मैं कोई आज नई नहीं बोल रहा , मेरे लेख मैं आप हमेशा क्रिटिसिज्म पढ़ते होंगे क्योंकि मैं दुनिया को एक कोने से बैठकर नहीं देखता, मैं देखता हूँ हर एक दिशा से ताकि सच को सच और गलत को गलत बता सकूँ, फिर चाहे किसी को मेरी बात अच्छी लगे या फिर नए विरोधी तैयार हो जाएं मेरी एक बात से |

अभी दो तीन दिन पहले जब ट्रिपल तलाक़ का फैसला आया था तो कुछ पॉलिटिशियन उसे अच्छा बता रहे थे और कुछ इसे धार्मिक दखलंदाजी , असलियत ये है ,कि ना तो उन्हें फैसले से फर्क पड़ता है ना ही धर्म से !

ये वो लोग हैं जो इंसान की चमड़ी बेचकर भी पैसा कमा सकते हैं , आज के फैसले पर किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई क्योंकि इसमें अनुसूचित जाति, मुस्लिम या फिर धर्म जैसा कोई मजेदार पहलू नहीं था , अब आप ही बताओ अगर मजेदार मुद्दा नहीं होगा तो ये लोग क्यों दिलचस्पी लेने लगे !

रेप होना तो बहुत साधारण है इनके लिए वरना ये मुद्दा तो २००३ में ही सुलझ चुका होता , अब जब कोई मैदान नहीं होगा तो ये लोग खेलने नहीं जाएंगे |
आपको याद ही होगा जाट आंदोलन में भी खूब नौटंकी हुई थी, क्योंकि वहां खट्टर की सरकार है तो विपक्ष को भी दंगा कराने में मजा आया था |

आखिर ऐसे ही मौके की तो तलाश होती है उनको कब हाथ सेंकने को मिले और हमारी पूर्ण बहुमत वाली केंद्र सरकार को खुदपर इतना भी भरोसा नहीं है कि एक सख्त निर्णय बिना किसी बैठक के ले सके !

ये लोग सलाह मश्विराह में इतना समय लगा देते हैं तब तक विध्वंस हो चुका होता है|

आखिर रणनीति राजनीति के खिलाड़ी जो ठहरे , बिना किसी प्रयोजन के ये कदम नहीं उठा सकते |
अब बात करते हैं अंधभक्तों की , आप लोग अपने उज्ज्वल भविष्य और उन्नति के लिए किसी बाबा या साधु की शरण में जाते हैं और उसे भगवान घोषित भी कर देते हैं !

अक्ल बेच खाई है क्या बेवकूफों?

श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि प्रत्येक जीव के अंदर एक आत्मा निवास करती है जिसका संबंध सीधे परमात्मा से है|

इसका मतलब ये हुआ कि आपका सीधा संपर्क परमात्मा से है तो फिर आप लोग सीधी बात खुदसे नहीं कर पाते क्या ?उसके लिए किसी के तलवे चाटने की आवश्यकता क्या है?

जो भी मांगना है खुदसे मांगों , भगवान ने आपको इतना समर्थ बनाया है कि आप खुदका भाग्य लिख सकते हो फिर क्यों आपको किसी चमत्कार करिश्मा की खोज रहती है ?

आप खुद एक चमत्कार हो जो कर्म से कुछ भी संभव कर सकता है फिर क्यों आप लोग अपने कर्म छोड़कर इस आडम्बर में स्वांग रचने जाते हो !

मैं बाबा और संत जनों का हृदय से सम्मान करता हूँ अगर वो संत धर्म और ज्ञान का प्रचार प्रसार करे और सदभावना का संदेश फैलाये , अगर वो खुदको चमत्कारी या फिर भगवान घोषित करता है तो उसे ढोंगी बोलने में कोई हर्ज नहीं है|

गुरु का काम अंधकार को मिटाकर उजाला लाना है , अपने अंधभक्त बनाना नहीं है !

आप लोग अगर इतने ही जोशीले हो और धर्म को मानने वाले हो तो 

तब आप लोग कहाँ चले जाते हो जब एक निर्दोष की हत्या करके गुंडे चले जाते हैं , जब एक निर्धन परिवार की महिलाओं के साथ दुराचार होता है या फिर सड़क चलती लड़कियों को कुछ मनचले रोज चौराहे पर छेड़ते हैं ,तब ये भीड़ आक्रोश सब कहाँ चला जाता है !

क्या आपका धर्म इस विषय मे कोई संदेश नहीं देता ?

क्या दुराचार धर्म के प्रतिकूल नहीं है क्या ?

मेरा विश्वास मानो मैं अहिंसा वादी नहीं हूं , अगर ये लोग एक रेपिस्ट या फिर हत्यारे को भीड़ जुटाकर मारते तो मैं इसे नृशंसय हत्या करार बिल्कुल नहीं दिया उल्टा मन ही मन शाबासी देता क्योंकि ऐसे सख्त कदम से हजार लोग और भी खुदको सुधार लेते !

मगर नहीं ऐसे मुद्दों पर ये भीड़ गुम हो जाती है , तब कोई उत्पाती निकलकर नहीं आता !

खैर मेरे हाथ थक गए हैं लिखते लिखते !

अब मैं कलम को विराम देता हूँ !

मुझे उत्सुकता से प्रतीक्षा है आपके विचारों की तो अपने विचार इस विषय पर जरूर दें !

धन्यवाद !

© Confused Thoughts

Shubhankar (स्वतंत्र कलम से निष्पक्ष विचार)

सपने क्या होते हैं?

​सपने क्या होते हैं?

अगर शाम ढले बेफ़िक्र होकर ,

लजीज़ खाना खाकर,

पंखा कूलर या फिर ऐसी की ठंडी हवा में ,

मख़मली से आराम गद्दों पर,

बड़े चैन की नींद सो जाते हो आप!

तो क्या खाक सपने देखोगे आप?


सपने वो होते हैं जो रातों की नींदें उड़ा दें,

चैन सुकून को तुम्हारा दुश्मन बता दें,

और इस शांत से दिमाग में कोलाहल मचा दें|



सपने वो नहीं जिन्हें सुबह आंखें खुलते ही भूल जाओ,

सपने वो हैं जिन्हें रात को आंखें मूँदने के बाद भी ना भूल पाओ!

Pic credit – https://pixabay.com/photo-2037255/


सपने वो नहीं जिसमें ऐश- ओ -आराम हो,

मस्त सी जिंदगी चले परेशानी का कोई नाम ना हो !

सपने वो हैं जिसमें आराम हराम हो,

तुम इन रफ्तार रोकने वाली रातों से भी परेशान हो|



वो सपने भी क्या सपने हुए?

जो बड़ी आसानी से मिल जाएं,

करना कुछ भी पड़े नहीं और सब कुछ बना बनाया मिल जाये !

सपने तो वो हैं जो पग पग पर तुम्हें सताएं,

चुनौतियों से तुम्हें और मजबूत बनाएं|



सपने देखो मगर देखभाल के देखो,

कुछ अपने भीतर खंगाल के देखो!

फिर मिल जायेंगे वो सपने तुम्हें भी,

जो आंखों से तुम्हारी नींदें छीन लेंगे|



© Confused Thoughts

– Shubhankar

कैसे हो आप सभी लोग ?

अब ब्लॉग पर आना काफी कम हो गया है मेरा फिर भी मेरी कोशिश रहती है कि आप सभी के पोस्ट ज्यादा से ज्यादा पढूँ , अगर फिर भी भूलवश कोई ब्लॉग छूट जाता है तो आप कमेंट में मुझे याद दिला सकते हैं ताकि मैं आपकी मूल्यवान रचनाएं पढ़ने से वंचित ना रह जाऊं!

धन्यवाद !

नमस्कार,प्रणाम !

 

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

​विस्फोटकों के डर से,

सेना हटती नहीं हमारी!

Indian Bloggers

अरि दल की  साजिशों से ,

गति रुकती नहीं हमारी!

अवशेष ,संस्कृति से ,

दृष्टि हटती नहीं हमारी !

अपवाद बंदिशों से ,

छवि डिगती नहीं हमारी !

कुछ खास है हममें ,

की हस्ती मिटती नहीं हमारी !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||



आदर्श देख इसके 

लोग सुदूर से आते हैं ,

विचार देख इसके,

चकित रह जाते हैं!

सत्कार देख यहां का,

वो यहीं  बस जाते हैं !

आलोचकों के इरादे सब ,

धरे के धरे रह जाते हैं ||



कोशिश हजार कर लो ,

बंदिश लगा के धर लो !

कसमें लगा लो जितनी ,

ताकत लगा लो जितनी !

मुँह एक साथ खोलेंगे ,

फिर एक स्वर में बोलेंगे –

“आसानी से मिटा दोगे,

हस्ती इतनी छोटी नहीं हमारी !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा” ||



कितने भी जाति , धर्म 

और प्रान्त बना लो ,

छल-प्रपंच सारे तुम लगा लो !

सब अपने अपने गुट बना लो ,

फिर सज्जनों में फूट डालो!

चाहे धर्म की तुम लड़ाईयां लड़ा लो ,

फिर हवाओं में जादू डोलेगा,

देशप्रेम का अमृत घोलेगा !

हर युवा शान से बोलेगा –

“सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा” ||



स्वतंत्रता के रंग में,

ध्वज देख कर गगन में !

सीना  गर्व से चौड़ता है ,

रक्तचाप तेजी से दौड़ता है!

रेशे चढ़ जाते हैं मेरे ,

कलाइयों और हाथों के!

ह्रदय तेज से धड़कता है,

हर एक अंग फडकता !

और मन कामनाओं में डूबा

की यहाँ जन्म हो दोबारा ,

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||



भूतल  के  अंक में  ,

गढ़ा है तिरंगा प्यारा !

समतल से प्रांगण में ,

रहे स्वाभिमान हमारा !

उन्नति के प्रयास हों ,

ये ध्येय रहे हमारा !

हस्ती यूं हीं जीवित रहे ,

उद्देश्य ये हमारा !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||

जय हिंद, जय भारत !


आप मेरी इस कविता को मेरी आवाज में सुनना ना भूलें 

लिंक



©Confused Thoughts

शुभांकर

ये थोड़ा बेवकूफाना है मगर आप अपने विचार इस लिंक पर दे सकते हैं 😀

बातों को बातों में ही रहने दो !

​आशियाना किसको नहीं भाता ?सबको भाता है ,

तुम्हें नए नए आशियाने भाते हैं ,

और मुझे अच्छे लगते हैं  पुराने मकान!
तुम हर्षोल्लास के साथ नये नये स्थानों पर रहो,

मेरा क्या?मैं ठहरा हठी !

मुझे तुम उसी पुराने मकान में रहने दो !

वो अठखेलियाँ,वार्तालाप सब भूतकाल की बातें हैं ,

अब उन सब बातों को सिर्फ बातें ही रहने दो |

हिंदी चलचित्र पटकथा के समान तुम्हारे इस प्रेम प्रसंग में,

प्रेमी नायक का किरदार मैं नहीं निभा सकता !

हाँ! वो बात अलग है कि नायिका के लिए उपयुक्त पात्र तो तुम भी नहीं थीं!

मगर ये सब बातें हैं इन्हें बातों में रहने दो|

विशिष्ट सुरक्षा घेरे में घिरे तुम्हारे क़ैद मन मस्तिष्क का,

भला कैसे में गहन अध्ययन कर पाता ?

तुम्हें तो लगता है , जैसे मेरे पास कोई दिव्य शक्ति है विचारों को पढ़ने की !

अगर शक्ति होती तो मैं साधारण मनुज कहाँ कहलाता ?

खैर ये सब बातें हैं अब इन्हें बातें ही रहने दो |

तुम हो कोई प्रख्यात सुकुमारी जैसी,

तुम रहो आरामदायक , वातगामी अपने नये नये घरों में !

मैं हूँ युद्ध में सब कुछ हार चुके राजा के जैसा ,

मुझे पीड़ानाशक वनवास में सिर झुकाकर अकेले रहने दो !
स्वप्नों की आकांक्षाएं और प्रेम पिपासा!

 ये सब सिर्फ बातें थीं अब उन्हें बातों में ही रहने दो |

Pic credit- https://images.vice.com/vice/images/articles/meta/2015/04/08/i-was-assaulted-on-the-street-but-i-still-walk-home-alone-at-night-408-1428519902.jpg

शुभांकर 

© Confused Thoughts

आप सभी लोगों के अपार स्नेह और उत्साहवर्धन के चलते में व्यस्ततम दिनचर्या से थोड़ा समय लिखने के लिए निकाल पाया हूं ,आशा है आप अपने विचार जरूर देना चाहेंगे !

धन्यावाद!


कच्चे मकान!

​दशक डेढ़ दशकों में कुछ बदलाव मेरे गांव में हुए हैं ,

वो कच्चे मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए हैं !


बदलाव भी बड़ी गज़ब प्रक्रिया है ,

अब देखो!

मकान तो सारे के सारे पक्के हो गए मगर रिश्ते-नाते , विश्वास और मेलजोल ये सब कच्चे हो गए !

कभी खेला करते थे जिस शैतानों की टोली में ,

आज व्यस्त और समझदार वो सब बच्चे हो गए |



कुछ अपनापन सा था उन कच्चे मकानों में,

जो मिला नहीं कभी इन पक्के मकानों में !



वो तंगहाली और ऊपर से घनघोर बरसात ,

घर की कच्ची छत से पानी का रिसाव ,

फिर भी अपनेपन का ना था कोई अभाव!



उस कच्ची छत में गोरैया के अनेकों घोंसले ,

मानो एक कच्चे घर में पूरा मोहल्ला बस गया हो !

दिन भर उनके बच्चों की चहचाहट ,

ऐसे लगता था जैसे सारे मिलकर शैतानियां कर रहे हों |



शाम ढ़लते ही लगता था जैसे दुनिया थम सी गयी हो,

आँगन में बैठकर घर वापसी करते पक्षियों को एकटक निहारना ,

ऐसा प्रतीत होता था ,जैसे वो भी अब आराम की तलब में हैं!

फिर कुछ पहर बाद गूँजता था सन्नाटा|

Img Source – http://images.sncurjanchal.in//2017/04/img-20170420-wa0062-583×330.jpg

मगर आज वो गोरैया कहीं गायब हो गयी ,
आसमान में पक्षियों की कतारें संध्या वेला से नदारद हो गईं!

भले ही उजाला अधिक हो इन बनावटी रोशनियों का ,

मगर शाम वाली वो बात अब गायब हो गयी,

रातें भले ही अब लोगों की चहल पहल से गुलजार हो चली हैं,

बड़ी बैचैन , परायी सी अब ये रातें हो गईं |



मकान कच्चे थे तो क्या हुआ ?

रिश्ते -नाते , चैन सुकून सब पक्के हुआ करते थे !

मेरे गांव के वो मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए ||
शुभांकर 
© Confused Thoughts

मेरी छोटी सी रचना पढ़ने के लिए धन्यवाद ! 

आशा करता हूँ ,आप सभी कुशल मंगल अपने कार्य क्षेत्र में संलग्न होंगे !

इन्हीं शब्दों के साथ अब में विराम लेता हूँ !

सादर प्रणाम , राम – राम 🙏🙏🙏

मेरी माँ

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जन्म वगरह का तो कुछ याद नहीं कुछ ,

आपने भी बाकी सबकी तरह मेरे लिए दर्द सहा होगा !

हाँ उन दिनों को याद करके, मुझे आज भी हंसी आती है! जब मुझे जबरदस्ती पकड़कर दाल पिलाई जाती थी |

जो मुझे तब बिल्कुल पसंद नहीं थी |

शब्द ज्ञान , मात्रा , लेख सब कुछ सिखाया था,

अगर गलती करो तो डाँट भी लगाई जाती थी !

और जब मेरा दाखिला हुआ तो

रोज शाम को स्कूल से नाम कटाने की जिद्द करना ,

और फिर सुबह आपका मुझे तैयार करके फिर से स्कूल भेज देना !

ये क्रम लगातार चला!
मुझे आज भी याद है |

उसी का परिणाम है कि आज मैं कुछ लिखने लायक हुआ हूँ !

उस डाँट, जबरदस्ती और लगातार सुधारने का महत्व अब मैं भी समझ गया हूँ |

मेरी छोटी छोटी सफलता पर मुझसे भी ज्यादा खुश होना ,

हरेक बार मेरा आपकी बातों से प्रेरित होना!

और जब मेरी परीक्षाएं चलती थी रात रात को मुझसे भी बाद में सोना ,

और फिर मुझसे भी जल्दी जाग कर मेरे लिए नाश्ता बनाने के लिए खड़े होना|
ये त्याग आपने बिना शिकायत करे किया !

मेरी असफलताओं पर कभी प्रश्न नहीं किया , 
पुराना भुलाकर,आगे अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित किया !

बाकी सबके माँ बाप की तरह उम्मीदों का बोझ नहीं रखा कभी ,

मेरी असफलता के बावजूद भी आपके चेहरे पर क्रोध का भाव नहीं दिखा कभी !

मेरे जरा से बीमार होने पर 

आप आज भी व्याकुल हो जाती हो ,

खुद की छोटी बड़ी परेशानियों को बड़ी चालाकी से छुपाती हो!

मेरे हर निर्णय , हर एक कदम पर साथ देना ,

कोई भी नया कार्य करने से पहले और बढ़ावा देना !

ये सब आदतों में शुमार है आपके |
अभी आपके लिए कुछ कर नहीं पाया हूँ,

तो इसलिए झूठे वंचनो को में क्या कहूंगा !

हाँ भविष्य में ऐसा कुछ कर पाऊँ ,

ऐसी अभिलाषाएं में खुद से रखूंगा |

–  शिवा



©Confused Thoughts

please check out our channel and listen this poem in my voice – https://youtu.be/BE8aWHd1fN4

 

Happy Mother’s day

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

जैसा आपने पिछले पत्र में पढा था कि प्रेमिका रूठकर व्यंगपूर्ण पत्र लिखती है और जब यह पत्र उसके प्रेमी को मिलता है तो वो अपनी प्रेमिका को मनाने और भरोसा दिलाने के मकसद से पत्र का प्रेमपूर्ण जवाब लिखता है मगर मस्तिष्क में चलते गणित के कारण कैसे उसके विचार पत्र के माध्यम से निकलते हैं पढ़िए –

IMG source – http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg


प्रेमी  अपनी प्रेमिका से –

प्रेमिका मेरी ओ प्राण प्यारी!

तुम्हे एक पल हृदय से ना दूर किया है ,

तुम्हारा और मेरा संग तो रसायन विज्ञान में जल बनाने की प्रक्रिया है !

जैसे हाइड्रोजन नहीं छोड़ सकती ऑक्सीजन का संग,

भगवान ने ऐसा रचा है ,हमारा प्रेम प्रसंग|



दुविधा सुनो मेरा क्या हाल हुआ है,

पूरा समय गति के समीकरणों में उलझ गया है !

कभी बल लगाकर पढ़ाई की दिशा में बढ़ता हूँ,

कभी तुम्हारे प्रेम की क्रिया प्रतिक्रिया से पीछे तुम्हारी दिशा में खींचता हूँ|


मेरे विचारों का पाई ग्राफ उलझ जाता है ,

ये Tan@  के मान की तरह कभी ऋणात्मक अनंत तो कभी धनात्मक अनंत तक जाता है !

मेरे ग्राफ रूपी जीवन में सारे मान अस्थिर हैं ,

मगर तुम्हर स्थान मेरे हृदय में पाई(π) के मान की तरह स्थिर है|



मेरे दिन की व्यस्तता लघुत्तम समपवर्त्य (H.C.F )  जैसी है ,

मेरे कॉलेज का समय भाजक(Divisor) की तरह पूरे दिन रूपी भाज्य(Dividend) समय को बड़े भागफल(Quotient) से विभाजित करता है !

और फिर वो शेषफल भाजक का रूप धारण कर लेता है ,

बस यही प्रक्रिया अंत तक चलती है !

जब तक शेषफल(Remainder) रूपी समय शून्य ना हो जाये,

अब बताओ ऐसे में पत्र लिखने का समय कहाँ से लायें|



तुम्हारी यादें मेरे लिए गुणांक(Coefficient) के जैसी हैं ,

जो दिन प्रतिदिन मेरे प्रेम को ,

गुणनफल(Resultant) के रूप में कई गुणा वर्धित करती हैं !

तुम्हारे अलावा किसी और लड़की के बारे में सोच भी नहीं सकता ,

क्योंकि तुम्हारे अलावा बाकी सबकी छवि मेरे विशाल मान रूपी हृदय में दशमलव के बाद आने वाले तीन बिंदुओं जैसी है |



हमारा अलगाव , भटकाव सब काल्पनिक मान हैं ,

जो हमारे प्रेम रूपी वास्तविक मान के आगे कहीं नहीं रह जाता !

ये सब मोह माया मुझे कितना भी भ्रमित करें ,

मगर तुम्हारे शून्य रूपी शक्तिशाली प्रेम से विभाजित होकर सब शून्य में मिल जाता है |



.

परिस्थितियों ने मुझमें से तुम्हें घटाकर ये सोचा कि प्रेम का मान कम हो जाएगा !

मगर परिस्थितियों को हमारे बारे में अभी पता ही क्या है ?

शून्य को घटा लो चाहे जोड़ लो कितना भी !

हमारे प्रेम का मान तो फिर भी वही स्थिर(Unchanged) आएगा |


अब मैं अपने शब्दों को विश्राम देता हूँ,

अपने गणित के सिद्धांतों को विराम देता हूँ |


प्रेम पत्र-1

©Confused Thoughts

अपने महत्वपूर्ण विचार देना ना भूलें !

धन्यवाद !