Monthly Archives: August 2017

चिंगारी उठी कोई ,जल उठा शहर मेरा!

​चिंगारी उठी कोई फिर ,

छिट पुट सी बातों में जलने लगा शहर मेरा !

ना होश है उन्हें अपनों का , 

ना रहा कोई तेरा मेरा |


किसी ने बीच में जाकर सभी से प्रश्न ये पूछा ?

“क्या यही सिखलाता है मजहब – धर्म तेरा ?”


मचलकर लोग गुस्से में तुनक कर गुमान से बोले 

“ये शुरुआत थी अभी तक कि , हम पूरा जहाँ जला देंगे !”

Jla do

बड़ा विचलित हुआ वो सुनकर फिर भयभीत से कठोर स्वर में बोला –



” ये लो माचिस और ये ईंधन भी ,

जला दो अब ये शहर सारा!

ये घर सारे जला देना,

जला देना वो चौराहा !


वाहन भी जला दो तुम,

दुकानें भी जला देना !

किसी के आशियाने उजाड़ दो तुम,

किसी की रोजगारी जला देना |



जला दो वो शिला लेख सारे,

जिसमें इंसानियत का सबब हो!

जला दो वो तहज़ीब विरासत भी,

जिसमें आदाब-ओ – अदब हो |



वतन परस्ती की इबादतें भी ,

कानूनी हिसाब तुम जला देना !

मानवता सिखाने वाली,

किताबें तुम जला देना|


जलाकर राख कर दो तुम ,

मेरे देशी अरमानों को !

रहे बाकी कुछ जलाने को,

तुम मुझको भी जला देना |



बनेगी राख जब इन सबकी ,

हवा में मिलावटें होंगी!

तुम्हारे इन साफ चेहरों पर ,

कल जब कलिखें होंगी !


भले ही दर्ज ना हो तुमपर कोई आपत्ति अदालत में ,

मगर ऊपर वाले की अदालत में सुनवाईयाँ जरूर होंगी |”


वो खरा इंसान अभी इतना ही बोल पाया ,

उसकी तिरस्कारपूर्ण बातें सुनकर एक चतुर प्राणी चकराया !

पूरे माजरे को समझने में उसने एक मिनट ना लगाया!

फिर भीड़ को चीरकर वो जोरों से चिल्लाया –


ये प्रवचन नहीं दे रहा भक्तों , कर रहा ये हमारी कठोर निन्दा है !

ये पक्का कोई कांग्रेसी है या फिर बीजेपी का कोई नया एजेंडा है|”

इतने सुनने भर की देरी थी बस,

उठी लाठी चली कृपाण तन कर,

फिर टूट पड़े सब उस सज्जन पर!


चिंगारी उठी कोई,

फिर जल उठा शहर सारा|


© ConfusedThoughts

– Shubhankar

Do listen the audio version of this poem.

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राम रहीम के समर्थकों से जलता मेरा भारत !

​जला दो तुम मक़ान सारे ,

जला दो तुम शहर सारा,

ना आज का तुमको होश 

ना कल की सोचता है ये मूढ़ बुद्धि दिमाग तुम्हारा!
क्षमा चाहूँगा ये लेख मैं बिना किसी योजना के शुरू कर रहा हूँ ,क्योंकि पिछले ४-५ घंटों से लगातार मेरे अंदर भावनाएं हिलोरे खा रहीं हैं अगर मैंने अब कुछ नहीं लिखा तो मैं खुद में उलझकर रह जाऊँगा!

खैर मुद्दे की बात पर आते हैं , आज डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम उर्फ गुरमीत पर बलात्कार के आरोप सिद्ध हो गए हैं ,जो २००३ में उनकी ही एक शिष्या ने उनपर लगाए थे |

ये फैसला स्वागत के योग्य है इसमें कुछ बड़ी बात नहीं थी क्योंकि न्यायपालिका का उपयोग न्याय के लिए ही होता आया है और आगे भी होगा चाहे वो ट्रिपल तलाक़ की बात हो या फिर रेप के आरोपी को फांसी की सजा की !

मगर अभी कुछ अलग हुआ हरियाणा और दिल्ली में बाबा जी के समर्थकों ने दोपहर से तोड़फोड़ शुरू की थी और अब ये तोड़फोड़ खूनी हिंसा में तब्दील हो चुकी हैं जिसमें अभी तक 17 लोग मर चुके हैं और ४८ लोग बुरी तरह घायल हैं ,ये एक मीडिया रिपोर्ट है जिससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि आंकड़े अनुमानित हैं , असल स्थिति कुछ और भी भयानक होगी |

दिल्ली का आनंद विहार रेलवे और बस स्टैंड दोनों को खंडहर में तब्दील कर चुके हैं ये लोग!
पिछले 2दिन से इंटरनेट सेवा , स्कूल्स, कॉलेजेस सब कुछ बन्द किया हुआ था सिर्फ इसी फैसले की वजह से !मुझे एक बात अभी तक समझ नहीं आयी आखिर इतनी सतर्कता के बावजूद भी लोग बाज नहीं आये और उन्होंने अपना काम पूरे दिल से किया!

खुद को बाबा का समर्थक बताने वाले ये लोग अंधभक्ति में पागल हो चुके हैं कि इनको ना खुदकी फिक्र है ना देश की !

सबसे पहले तो मुझे आश्चर्य है आखिर सरकार सुबह से चुप क्यों है?

अभी तक सेना बुलाकर सीधा फायरिंग शुरू क्यों नहीं कराई ?

क्योंकि मुझे नहीं लगता ये लोग भारत के एक मुख्य नागरिक के हाशिये में आते हैं , जो लोग देश की संपत्ति या फिर लोगों की जान लेने पर तुले हैं ,उनके साथ दुश्मन जैसा व्यवहार होना लाजिमी है |

चाहे वो इंसान मैं हूँ या फिर मेरा कोई सम्बन्धी , सबके साथ समान रूप से व्यवहार होना चाहिए ,क्योंकि जो सैनिक वहां घायल हो रहे हैं वो भी मेरे संबंधी ,भाई या फिर हितेषी हैं जो व्यर्थ के मुद्दे पर अपना लहू बहा रहे हैं|
अब आता हूँ मैं राजनीति के मुद्दे पर , कड़वी बातें मैं कोई आज नई नहीं बोल रहा , मेरे लेख मैं आप हमेशा क्रिटिसिज्म पढ़ते होंगे क्योंकि मैं दुनिया को एक कोने से बैठकर नहीं देखता, मैं देखता हूँ हर एक दिशा से ताकि सच को सच और गलत को गलत बता सकूँ, फिर चाहे किसी को मेरी बात अच्छी लगे या फिर नए विरोधी तैयार हो जाएं मेरी एक बात से |

अभी दो तीन दिन पहले जब ट्रिपल तलाक़ का फैसला आया था तो कुछ पॉलिटिशियन उसे अच्छा बता रहे थे और कुछ इसे धार्मिक दखलंदाजी , असलियत ये है ,कि ना तो उन्हें फैसले से फर्क पड़ता है ना ही धर्म से !

ये वो लोग हैं जो इंसान की चमड़ी बेचकर भी पैसा कमा सकते हैं , आज के फैसले पर किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई क्योंकि इसमें अनुसूचित जाति, मुस्लिम या फिर धर्म जैसा कोई मजेदार पहलू नहीं था , अब आप ही बताओ अगर मजेदार मुद्दा नहीं होगा तो ये लोग क्यों दिलचस्पी लेने लगे !

रेप होना तो बहुत साधारण है इनके लिए वरना ये मुद्दा तो २००३ में ही सुलझ चुका होता , अब जब कोई मैदान नहीं होगा तो ये लोग खेलने नहीं जाएंगे |
आपको याद ही होगा जाट आंदोलन में भी खूब नौटंकी हुई थी, क्योंकि वहां खट्टर की सरकार है तो विपक्ष को भी दंगा कराने में मजा आया था |

आखिर ऐसे ही मौके की तो तलाश होती है उनको कब हाथ सेंकने को मिले और हमारी पूर्ण बहुमत वाली केंद्र सरकार को खुदपर इतना भी भरोसा नहीं है कि एक सख्त निर्णय बिना किसी बैठक के ले सके !

ये लोग सलाह मश्विराह में इतना समय लगा देते हैं तब तक विध्वंस हो चुका होता है|

आखिर रणनीति राजनीति के खिलाड़ी जो ठहरे , बिना किसी प्रयोजन के ये कदम नहीं उठा सकते |
अब बात करते हैं अंधभक्तों की , आप लोग अपने उज्ज्वल भविष्य और उन्नति के लिए किसी बाबा या साधु की शरण में जाते हैं और उसे भगवान घोषित भी कर देते हैं !

अक्ल बेच खाई है क्या बेवकूफों?

श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि प्रत्येक जीव के अंदर एक आत्मा निवास करती है जिसका संबंध सीधे परमात्मा से है|

इसका मतलब ये हुआ कि आपका सीधा संपर्क परमात्मा से है तो फिर आप लोग सीधी बात खुदसे नहीं कर पाते क्या ?उसके लिए किसी के तलवे चाटने की आवश्यकता क्या है?

जो भी मांगना है खुदसे मांगों , भगवान ने आपको इतना समर्थ बनाया है कि आप खुदका भाग्य लिख सकते हो फिर क्यों आपको किसी चमत्कार करिश्मा की खोज रहती है ?

आप खुद एक चमत्कार हो जो कर्म से कुछ भी संभव कर सकता है फिर क्यों आप लोग अपने कर्म छोड़कर इस आडम्बर में स्वांग रचने जाते हो !

मैं बाबा और संत जनों का हृदय से सम्मान करता हूँ अगर वो संत धर्म और ज्ञान का प्रचार प्रसार करे और सदभावना का संदेश फैलाये , अगर वो खुदको चमत्कारी या फिर भगवान घोषित करता है तो उसे ढोंगी बोलने में कोई हर्ज नहीं है|

गुरु का काम अंधकार को मिटाकर उजाला लाना है , अपने अंधभक्त बनाना नहीं है !

आप लोग अगर इतने ही जोशीले हो और धर्म को मानने वाले हो तो 

तब आप लोग कहाँ चले जाते हो जब एक निर्दोष की हत्या करके गुंडे चले जाते हैं , जब एक निर्धन परिवार की महिलाओं के साथ दुराचार होता है या फिर सड़क चलती लड़कियों को कुछ मनचले रोज चौराहे पर छेड़ते हैं ,तब ये भीड़ आक्रोश सब कहाँ चला जाता है !

क्या आपका धर्म इस विषय मे कोई संदेश नहीं देता ?

क्या दुराचार धर्म के प्रतिकूल नहीं है क्या ?

मेरा विश्वास मानो मैं अहिंसा वादी नहीं हूं , अगर ये लोग एक रेपिस्ट या फिर हत्यारे को भीड़ जुटाकर मारते तो मैं इसे नृशंसय हत्या करार बिल्कुल नहीं दिया उल्टा मन ही मन शाबासी देता क्योंकि ऐसे सख्त कदम से हजार लोग और भी खुदको सुधार लेते !

मगर नहीं ऐसे मुद्दों पर ये भीड़ गुम हो जाती है , तब कोई उत्पाती निकलकर नहीं आता !

खैर मेरे हाथ थक गए हैं लिखते लिखते !

अब मैं कलम को विराम देता हूँ !

मुझे उत्सुकता से प्रतीक्षा है आपके विचारों की तो अपने विचार इस विषय पर जरूर दें !

धन्यवाद !

© Confused Thoughts

Shubhankar (स्वतंत्र कलम से निष्पक्ष विचार)

सपने क्या होते हैं?

​सपने क्या होते हैं?

अगर शाम ढले बेफ़िक्र होकर ,

लजीज़ खाना खाकर,

पंखा कूलर या फिर ऐसी की ठंडी हवा में ,

मख़मली से आराम गद्दों पर,

बड़े चैन की नींद सो जाते हो आप!

तो क्या खाक सपने देखोगे आप?


सपने वो होते हैं जो रातों की नींदें उड़ा दें,

चैन सुकून को तुम्हारा दुश्मन बता दें,

और इस शांत से दिमाग में कोलाहल मचा दें|



सपने वो नहीं जिन्हें सुबह आंखें खुलते ही भूल जाओ,

सपने वो हैं जिन्हें रात को आंखें मूँदने के बाद भी ना भूल पाओ!

Pic credit – https://pixabay.com/photo-2037255/


सपने वो नहीं जिसमें ऐश- ओ -आराम हो,

मस्त सी जिंदगी चले परेशानी का कोई नाम ना हो !

सपने वो हैं जिसमें आराम हराम हो,

तुम इन रफ्तार रोकने वाली रातों से भी परेशान हो|



वो सपने भी क्या सपने हुए?

जो बड़ी आसानी से मिल जाएं,

करना कुछ भी पड़े नहीं और सब कुछ बना बनाया मिल जाये !

सपने तो वो हैं जो पग पग पर तुम्हें सताएं,

चुनौतियों से तुम्हें और मजबूत बनाएं|



सपने देखो मगर देखभाल के देखो,

कुछ अपने भीतर खंगाल के देखो!

फिर मिल जायेंगे वो सपने तुम्हें भी,

जो आंखों से तुम्हारी नींदें छीन लेंगे|



© Confused Thoughts

– Shubhankar

कैसे हो आप सभी लोग ?

अब ब्लॉग पर आना काफी कम हो गया है मेरा फिर भी मेरी कोशिश रहती है कि आप सभी के पोस्ट ज्यादा से ज्यादा पढूँ , अगर फिर भी भूलवश कोई ब्लॉग छूट जाता है तो आप कमेंट में मुझे याद दिला सकते हैं ताकि मैं आपकी मूल्यवान रचनाएं पढ़ने से वंचित ना रह जाऊं!

धन्यवाद !

नमस्कार,प्रणाम !

 

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

​विस्फोटकों के डर से,

सेना हटती नहीं हमारी!

Indian Bloggers

अरि दल की  साजिशों से ,

गति रुकती नहीं हमारी!

अवशेष ,संस्कृति से ,

दृष्टि हटती नहीं हमारी !

अपवाद बंदिशों से ,

छवि डिगती नहीं हमारी !

कुछ खास है हममें ,

की हस्ती मिटती नहीं हमारी !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||



आदर्श देख इसके 

लोग सुदूर से आते हैं ,

विचार देख इसके,

चकित रह जाते हैं!

सत्कार देख यहां का,

वो यहीं  बस जाते हैं !

आलोचकों के इरादे सब ,

धरे के धरे रह जाते हैं ||



कोशिश हजार कर लो ,

बंदिश लगा के धर लो !

कसमें लगा लो जितनी ,

ताकत लगा लो जितनी !

मुँह एक साथ खोलेंगे ,

फिर एक स्वर में बोलेंगे –

“आसानी से मिटा दोगे,

हस्ती इतनी छोटी नहीं हमारी !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा” ||



कितने भी जाति , धर्म 

और प्रान्त बना लो ,

छल-प्रपंच सारे तुम लगा लो !

सब अपने अपने गुट बना लो ,

फिर सज्जनों में फूट डालो!

चाहे धर्म की तुम लड़ाईयां लड़ा लो ,

फिर हवाओं में जादू डोलेगा,

देशप्रेम का अमृत घोलेगा !

हर युवा शान से बोलेगा –

“सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा” ||



स्वतंत्रता के रंग में,

ध्वज देख कर गगन में !

सीना  गर्व से चौड़ता है ,

रक्तचाप तेजी से दौड़ता है!

रेशे चढ़ जाते हैं मेरे ,

कलाइयों और हाथों के!

ह्रदय तेज से धड़कता है,

हर एक अंग फडकता !

और मन कामनाओं में डूबा

की यहाँ जन्म हो दोबारा ,

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||



भूतल  के  अंक में  ,

गढ़ा है तिरंगा प्यारा !

समतल से प्रांगण में ,

रहे स्वाभिमान हमारा !

उन्नति के प्रयास हों ,

ये ध्येय रहे हमारा !

हस्ती यूं हीं जीवित रहे ,

उद्देश्य ये हमारा !

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||

जय हिंद, जय भारत !


आप मेरी इस कविता को मेरी आवाज में सुनना ना भूलें 

लिंक



©Confused Thoughts

शुभांकर

ये थोड़ा बेवकूफाना है मगर आप अपने विचार इस लिंक पर दे सकते हैं 😀