कच्चे मकान!

​दशक डेढ़ दशकों में कुछ बदलाव मेरे गांव में हुए हैं ,

वो कच्चे मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए हैं !


बदलाव भी बड़ी गज़ब प्रक्रिया है ,

अब देखो!

मकान तो सारे के सारे पक्के हो गए मगर रिश्ते-नाते , विश्वास और मेलजोल ये सब कच्चे हो गए !

कभी खेला करते थे जिस शैतानों की टोली में ,

आज व्यस्त और समझदार वो सब बच्चे हो गए |



कुछ अपनापन सा था उन कच्चे मकानों में,

जो मिला नहीं कभी इन पक्के मकानों में !



वो तंगहाली और ऊपर से घनघोर बरसात ,

घर की कच्ची छत से पानी का रिसाव ,

फिर भी अपनेपन का ना था कोई अभाव!



उस कच्ची छत में गोरैया के अनेकों घोंसले ,

मानो एक कच्चे घर में पूरा मोहल्ला बस गया हो !

दिन भर उनके बच्चों की चहचाहट ,

ऐसे लगता था जैसे सारे मिलकर शैतानियां कर रहे हों |



शाम ढ़लते ही लगता था जैसे दुनिया थम सी गयी हो,

आँगन में बैठकर घर वापसी करते पक्षियों को एकटक निहारना ,

ऐसा प्रतीत होता था ,जैसे वो भी अब आराम की तलब में हैं!

फिर कुछ पहर बाद गूँजता था सन्नाटा|

Img Source – http://images.sncurjanchal.in//2017/04/img-20170420-wa0062-583×330.jpg

मगर आज वो गोरैया कहीं गायब हो गयी ,
आसमान में पक्षियों की कतारें संध्या वेला से नदारद हो गईं!

भले ही उजाला अधिक हो इन बनावटी रोशनियों का ,

मगर शाम वाली वो बात अब गायब हो गयी,

रातें भले ही अब लोगों की चहल पहल से गुलजार हो चली हैं,

बड़ी बैचैन , परायी सी अब ये रातें हो गईं |



मकान कच्चे थे तो क्या हुआ ?

रिश्ते -नाते , चैन सुकून सब पक्के हुआ करते थे !

मेरे गांव के वो मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए ||
शुभांकर 
© Confused Thoughts

मेरी छोटी सी रचना पढ़ने के लिए धन्यवाद ! 

आशा करता हूँ ,आप सभी कुशल मंगल अपने कार्य क्षेत्र में संलग्न होंगे !

इन्हीं शब्दों के साथ अब में विराम लेता हूँ !

सादर प्रणाम , राम – राम 🙏🙏🙏

Advertisements

37 thoughts on “कच्चे मकान!

      1. Mai 90’s kid nhi hu par jab mai chotti thi i enjoyed a lot , aaj k bache sirf mobile aur computer mai busy rhte h par uss samay phone nhi chalta tha, maine har pal enjoy kiya h apne bachpan ko

        Liked by 1 person

  1. Wow bahut hi sundar… “kacche makkan ab pakke ho gaye hai” aur pakke makkno mein ab rishte sahi mein kahin gum ho gaye hai.
    My fav lines aapki kavita ki :
    kabhi khela karte the jo bacche shaitano ki toli mein, aaj woh vayest aur samajdar ho gaye hai….
    Superb👍

    Liked by 1 person

  2. मकान पक्के हो गए…रिश्ते कच्चे हो गए….👌तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने गावँ के रिश्ते तक को अछूता नही छोड़ा है …

    Liked by 1 person

      1. बहुत अच्छा लगा मुझे !
        सच में अच्छी फीलिंग्स आती हैं जब कोई हमारी रचनाओं को इतने चाव से पढ़ता है!
        बहुत धन्यवाद आपका की आपने अपने कीमती समय मे से इतना समय सिर्फ मेरी रचनाएं पढ़ने के लिए निकाला!

        Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s