हिंसक-अहिंसा

अभी जैसा आप सबको पता है देश में एक गंभीर समस्या चल रही है , उस समस्या का अभी तक कोई समाधान नही मिल पा रहा

रोज हम अखबारों में सैनिकों के शहीद होने की खबर पढ़ते हैं ऐसी खबर पढ़कर मेरे अंदर बहुत उथल पुथल होती है समझ नहीं आ रहा आखिर ये रुकने का नाम क्यों नहीं ले रहा उसी व्यथा को मैंने कुछ शब्दों के माध्यम से लिखा है शायद कुछ लोगों को आपत्ति भी हो मेरे शब्दों पर मगर क्षमा चाहूँगा स्पष्टवादी हूँ –



बड़े शौक से लोग पढ़ते हैं और नसीहत देते हैं 

शांतिप्रियता मनुष्यता का प्रमाण है !

ऐसे शांति पक्षधरों को आज स्पष्ट शब्दों में बोलूंगा 

राजनीति , कूटनीति , इतिहास सारे पन्ने खोलूंगा !
खैर राजनीति तो कल परसों की कहानी है 

मगर सिंधु घाटी की ये सभ्यता तो वर्षों पुरानी है 

जब जब शांति की शरण में कोई गया था

तब तब उसकी उसकी हस्ती को शत्रु निगल कर गया था!

एक बार गौर करो इतिहास पर ऐसी अनेकों कहानी हैं !

तुम खोलो तो सही महाभारत  का विवरण

वो पांडवों के शांति प्रस्ताव का प्रकरण 

दुर्योधन समस्त राज हथियाने चला था 

भगवान कृष्ण को भी बंदी बनाने चला था !



इतिहास पढो तुम चक्रवर्ती सम्राट का 

जो खेल खेलता था शत्रुओं के विनाश का 

सुदूर देश की क्या मजाल जो आँख उठाकर भारत की तरफ देख सके 

किसी के क़दमों में साहस नहीं था जो सीमा में घुस सके 

किंतु अंत किसी ने ना जाना 

जब अशोक ने शांति का दामन थामा 

मगर परिणाम देखकर आपको होगा अचरज 

गृहयुद्ध , क्षीणता , अधिपत्य और कमजोर वंशज 

फिर ना बना सका कोई एक क्षत्र शासक !

शांति के दूतों का जब हुआ था भारतवर्ष में आगमन 

तब हमें क्या मिला ?

600 वर्षों तक मुगल अत्याचार फिर २०० वर्षों तक अंग्रेजी गुलामी का शासन!

मुझे नहीं पता आप हिंसक हो या फिर अहिंसावादी हो 

या फिर मेरी तरह विचारवादी हो 

मगर कैसे भुला सकते हो नेहरू और गाँधी को 

मैं बहस बिल्कुल नहीं करूंगा स्वतंत्रता दिलाने में योगदान किसका अधिक था !



मगर ये जरूर है 

अहिंसा का प्रयोग उस समय 

मौलिक से ज्यादा भौतिक था !

तब अहिंसा अगर कुछ दिन चुपचाप गहरी नींद सोती 

तब भारत में इतनी ना हिंसा होती 

और आज की स्थिति ना इतनी  गंभीर होती !

वहां सीमा पर देश का जवान शहीद होता है 

और वो राजनीतिक महकमा चैन की नींद सीता है 

कभी सीमा पर कभी सीमा के भीतर रोज मर रहे हैं हम 

पड़ौसी मुल्क से तो क्या निपटेंगे 

खुद अपने ही देश में जाने किससे डर रहे हैं हम ?

शस्त्र , सेना , गोला बारूद का भंडार है 

माँ भारती की कृपा से धन धान्य भी अपार है 

उसके बावजूद भी शत्रु रोज घर में घुसकर घुसपैठ कर रहे हैं 

हम अभी भी ना जाने किस घड़ी का इंतजार कर रहे हैं !

मैं शांतिप्रिय छवि अब उतारने को बोलूंगा 

हिंसक बनकर दहाड़ने को बोलूंगा !



©Confused Thoughts


 

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26 thoughts on “हिंसक-अहिंसा

    1. Bhut Sahi baat Kahi Hai apne
      Khana vgrh to phirr b Baad ki baat Hai
      Unhe apni marji SE koi action b Ni Lene dete even terrorists Roj a jate Hai
      Agr ek bar India k andar operation ho jaye to khud ye log ana bnd kr denge mgr jaisa apne b dekha hoga news m ki vo Jeep wale incident p v court case BNA Diya kuch AISE hain India ke rules and Constitution vhi agr USA vgrh HOTA to lash ka b ptA nahi chlne dete vo log
      Strict action decipline bnane ke liye jruri Hai
      Btw thanks for reading my small effort

      Liked by 1 person

      1. Ye toh bilhul sahi baat kahi hai. Magar government waale isliye bhi nahi unko khud se action nahi lene dete kyunki agar aisa hua toh har jagah sab apni hi marzi chalayenge aur hahakaar mach jaayega. Kashmir ki haalat toh tum jaante hi ho.

        Liked by 1 person

      2. Haan mgr kbhi kbhi action BHI jruri HOTA Hai
        Kashmir ki halat vha ke logon ne khud bnayi Hai
        Phle kashmiri panditon ko bhga Diya terrorists ke Sath milke ab vo terrorists unke Ghar m ghuste Hai unka harrasment krte Hai
        Rhi Sahi kasar Sena utaar deti Hai kuki vo b to pathhar marte hai phle

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  1. मेरे विचार से अन्तर्मन की व्यथा विचार अभिव्यक्त कर स्वयं में आनन्दित रहने का यह एक अच्छा साधन है।

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  2. अशोक नै कलिंग में तबाही मचाई, जिससे उसके बेटबेटी घर छोडकर बुद्ध की शरण में चले गये।क्या किया उसने, केवल हुकूमत और हुकूमत, उसके बच्चों ने उसका त्याग ही कर दिया।

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      1. हिंसक बन कर….
        ये तो तभी होगा जब अपरोक्ष रूप से कलम को तलवार बनाया जाए।इस तरह बहुत बड़े समाज के प्रवाह को बदला जा सकता है।उसके लिए बोलती कलम चाहिए।

        Liked by 1 person

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