Monthly Archives: March 2017

तू और मैं

एक तू है और एक मैं हूँ इस रिश्ते में 

मेरे लिए तू ही सब कुछ होती है 

मेरी हर बात में सिर्फ तू होती है 

मगर अफ़सोस मैं कैसे जताऊं 

इस तू तू मैं मैं का हाल कैसे समझाऊ 

क्योंकि तेरे लिए मैं ज्यादा जरूरी है सारे जमाने से 

 ज्यादा
तेरे इस मैं में तेरा स्वार्थ छिपा है 

मेरे लिए तू में मेरा मैं छुपा है 

इसीलिए तू ,तू है आज भी 

और मैं तो आज भी मैं हूँ

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बोधकथा – मितव्ययी बनो

​आज की बोध कथा मैंने अपने स्कूल में किसी शिक्षक के शब्दों में सुनी थी शब्दशः मुझे याद नहीं मगर उसका सार मैं आपको सुनाता हूँ शायद ये कथा अपने भी कहीं सुनी हो

 जैसा की बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के बारे में सभी ने सुना है जिसकी स्थापना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी , ये किस्सा उन दिनों का है जब पंडित जी ने विश्वविद्यालय बनाने का संकल्प लिया मगर स्थापना के लिए एक बड़ी राशि की आवश्यकता थी इतनी राशि पंडित जी के पास तो थी नहीं मगर फिर भी उन्होंने आस पास के गांव जाकर लोगों से चंदा एकत्रित करना शुरू किया

वो बारी बारी से धनी सेठो के पास जाते और उनसे शिक्षा के मंदिर के निर्माण के लिए योगदान मांगते , कुछ दयालु सेठ , साहूकार श्रद्धा अनुसार धन देकर पंडित जी को विदा करते तो कुछ दुत्कार कर भगा देते 

एक बार किसी ने पंडित जी को बताया फलां गांव में बड़ा धनी साहूकार रहता है और वो समाज कल्याण के कार्यों में हमेशा योगदान देता है , पंडित जी शाम के समय वहां पहुंचे तो साहूकार कुछ आवश्यक कार्य कर रहा था इसलिए उसने पंडित जी को प्रतीक्षा करने के लिए बोला और खुद पंडित जी के पास में ही अपना कार्य करता रहा ,

 अब पंडित जी सोच रहे थे बड़ा कंजूस है देखो दीये के प्रकाश में ऑंखें फोड़ रहा है ये नहीं की लैंप खरीद ले मगर फिर भी वो धैर्य के साथ प्रतीक्षा करते रहे इतने में साहूकार का एक छोटा सा लड़का खेलता हुआ कमरे में घुसा और उसने खेल खेल में माचिस उठा ली और कुछ ही देर में उसने दो तीली बिगाड़ दी अब जैसे ही काम खत्म करने के बाद साहूकार की नजर अपने बेटे पर पड़ी उसने फटाक से माचिस छीनी उसके हाथ से और दो तीन थप्पड़ लगा दिए उसके गाल पर और बोला 

“इतनी मेहनत का पैसा ऐसे खराब करेगा ,पता भी है तूने 2 तीली बिगाड़ दी ”

अब पंडित जी को ये बात बड़ी आश्चर्यजनक लगी और वो मन ही मन सोचने लगे वैसे तो इतना धनी सेठ है और 1 आने की माचिस की तीली के लिए इकलौते लड़के को थप्पड़ लगा दिये, ये तो बड़ा ही कंजूस है इससे में धन की अपेक्षा कैसे रख सकता हूँ !

जो दीपक की रौशनी से लिखा पढ़ी कर रहा हो और एक एक तीली पर ऐसे गुस्सा कर रहा है मानो लाखों का नुकसान हुआ हो , ये कैसे दे सकता है चंदे की राशि

अब वो सेठ पंडित जी के पास आया और राजी ख़ुशी लेने लगा कुछ देर बाद पंडित जी ने सोचा रात होने वाली है और वैसे भी यहां रुकने का कोई फायदा नहीं तो वो बोले ठीक है तो अब हम विदा लेते हैं जब सेठ मुख्य द्वार तक पंडित जी को विदा करने आया तो पंडित जी से बोला वैसे पंडित जी आपने बताया नहीं कैसे आना हुआ हमारे घर?

 पंडित जी पहले संकुचित हुए मगर फिर बोले हम विश्वविद्यालय का निर्माण करने जा रहे हैं उसी के लिए चन्दा एकत्रित कर रहे हैं आपके पास भी आये थे मगर जो व्यक्ति 2 तीली के लिए बेटे को मार सकता है वो चन्दा कहाँ दे पाएगा

सेठ बोला रुकिए आप यहीं और अंदर से एक पोटली निकाल कर लाया और बोला ये २५०००(उस समय की बहुत बड़ी राशि) रूपये हैं , अगर इस धर्मार्थ के कार्य में मेरा कुछ धन काम में आता है तो ये मेरे लिए सौभग्य की बात है पंडित जी स्तब्ध थे सेठ उनके चेहरे का भाव समझ गया और बोला पंडित जी मेरा बेटा अभी छोटा है अगर वो ऐसे धन को व्यर्थ करेगा तो ये आदत से व्ययी बना देगी और धर्म का व्यय हमेशा धर्मार्थ के कार्यों में होना चाहिए न की फिजूलखर्ची में , पंडित जी ने सेठ को प्रणाम किया और गंतव्य की ओर निकल पड़े और मन ही मन खुद को कोस रहे थे की उनके मन में ये बात आ कैसे गयी थी और वो सेठ तो मुझसे भी ज्यादा समर्पित निकला

 शिक्षा -इस बोधकथा से हमे दो शिक्षाएं मिलती हैं 

1- कभी भी खुद से किसी व्यक्ति के स्वाभाव का निर्णय नहीं कर लेना चाहिए 

2- धन का उपयोग धर्मार्थ के कार्यों में करना चाहिए ना की व्यर्थ में 

क्योंकि व्यर्थ में व्यय हुए धन से किसी को कोई लाभ नहीं मिलेगा मगर धर्मार्थ से बहुत सारे लोगों को लाभ मिलेगा इसलिए मितव्ययी बनो|

धन्यवाद 

©Confused Thoughts
अपने विचार देना ना भूलें अगर ऐसी कोई बोधकथा आपको भी आती है तो आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं आपकी कथा गेस्ट पोस्ट सीरीज में अगले रविवार को पब्लिश  होगी,   अधिक जानकारी के लिए आप मुझे मेल करें 

Shubhankarsharma428@gmail.com

Guest Post – Three Faces of Society

The Pradita Chronicles

Shubhankar Sharma

Blog – Confused Thoughts


I always saw the different blogs about social issues, also I analyze them today. I would like to give my opinion which comes after a case study. I don’t know if I am describing it in right manner or just throwing useless content.

Now let’s start…

First of all, we’ll talk about general social issues. It may be any riot, rape case, kidnapping, political issue, religious issue or any other type of harrasement, and so on .

After every case we just blame others for circumstances, we never try to observe the situation, we never try to make any changes. We just think that we will speak up and it will improve our social image. I am sorry, I am bitter speaker but it is the truth. I think I should cut the crap because it will distract me from the real  topic which…

View original post 834 more words

व्यंग -एंटी रोमियो स्क्वाड 

जैसा की हम सबको पता है , मार्च महीने में उत्तर प्रदेश में काफी उथल पुथल हुए हैं ,हाँ !अगर आप समझ गए तो आपको पता होगा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और माननीय योगी आदित्य नाथ जी को मुख्य मंत्री नियुक्त किया गया |अब आप सोच रहे होंगे मैं ये सब क्यों बता रहा हूँ ये बातें तो सबको पता हैं , हाँ जरूर मै बीजेपी का समर्थक हूँ तभी शेखी बघार रहा हूँ ,तो नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है |आज कुछ ऐसा हुआ की मुझे व्यंग लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा आशा करता हूँ ,आप लोग व्यंग को व्यंग की तरह लेंगे कोई भी इसे गंभीरता से नहीं लेगा|

हुआ यूँ की जैसा आप सबको पता है मनचलों से निजात पाने के लिए योगी जी ने एंटी रोमियो स्क्वाड गठित की है , अब उनकी पूरी टीम यहां हमारे नॉलेज पार्क में फैली हुई है तो आज वो सारे कॉलेजेस के बाहर खड़े हो गए और किसी से भी पहचान पत्र मांग रहे थे और जैसा की यहां की सभ्यता रही है ,लड़के लड़कियां खुले आम आपस में प्रेम प्रदर्शन सडकों पर करते आए हैं तो बस आज उनपर पुलिस ने जमकर कहर बरपाया किसी के पापा को फ़ोन मिलाया, किसी की मम्मी से पूछा क्या आपकी बेटी लड़के से चिपक कर सार्वजानिक घूम सकती है ?😂😂अगर आप इजाजत देते हैं तो ठीक है वरना हम लड़के के घर भी एक बार बात कर लेते हैं 😉

खैर ये बात सभी युवाओं पर नागवार गुजरी !

पहले एक डर हुआ करता था कि वेलेंटाइन वीक में बजरंग दल वाले किसी को भी धर दबोचेंगे मगर योगी जी ने तो वो काम अब कानून को सौंप दिया|

मैं भी चकित हुआ वैसे मुझे कोई खतरा नहीं है ,क्योंकि!क्योंकि  अब बार बार क्या बताना! 😋

मगर फिर भी अपने दोस्तों का दर्द मैं भलीभांति समझ सकता हूँ तो मैंने भी कुछ कारण जानने का प्रयास किया आखिर इतना अन्याय क्यों ?

फिर मै कुछ नतीजों पर पहुचा:–

१- जैसा की हम सबको पता है योगी जी भी मेरी तरह सिंगल हैं तो जरूर उन्हें जलन होती होगी जब कोई प्रेमी जोड़ा खुलेआम पार्क में या फिर सड़क पर एक दूसरे के होठ चूमता होगा आखिर मानव व्यवहार है ,   सिंगल्स को होती है |

२- कुछ सूत्रों से पता चला है कि ये एंटी रोमियो स्क्वाड गुजरात में भी चलता है |इसका मतलब मोदी जी को भी ये सब रोकना था और उनके अभियान से प्रभावित होकर योगी जी ने ये उत्तर प्रदेश में भी लागू किया !अरे हाँ याद आया मोदी जी भी तो सिंगल हैं ;)तभी में कहूँ !आखिर बेचारे युगलों से इतनी दुश्मनी क्यों ? 

३- कुछ सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि योगी जी भी सामान्य छात्र की तरह कॉलेज जाते थे !जब उनके सहपाठी अपनी अपनी प्रेमिकाओं के साथ ये सब करते थे तो उनका मन द्रवित हो उठता था तभी उन्होंने प्रतिज्ञा ली की किसी दिन मैं ये सब हमेशा के लिए बंद करा दूंगा?जब मेरी कोई प्रेमिका नहीं तो अब किसी की भी नहीं बनेगी !

४- ये मेरा एक सिंगल होने के नाते अनुभव रहा है |हमेशा हमारे कॉलेज गेट पर पुलिस की एक जीप होती है ,उसमें दो तीन जवान होते है !जो कभी किसी छात्र से कुछ नहीं कहते थे ,यहां तक की युगल उनके सामने प्रेम प्रदर्शन की हदें तोड़ लेते थे मगर आज वो बदल क्यों गये ?आज वो चुप क्यों नहीं रहे |

तब मुझे समझ आया  कि  ये पहले भी जरूर मन ही मन कुढ़ते होंगे, ये सब देखकर मगर सरकार के आदेश अनुसार उन्हें चुप रहना पड़ता था |आज मौका मिला है तो वो भी आग में हाथ सेंक रहे हैं !पक्का तभी की भड़ास वो जमकर निकाल रहे हैं|

५- ये भी हो सकता है ,कालेज के सिंगल लड़के लड़कियों ने भगवान् से दुआ मांगी हो! हाँ अब आपसे क्या छुपाना उनका जीना हराम रहता है ,चारों तरफ प्रेमी जोड़े विचरण करते हैं !बिन ये सोचे वो एक दूसरे के साथ प्रेम पींगे  बढाते हैं जबकि उन्हें पता है, इन बेचारों को क्यों जलाया जाये जिनका जोड़ा नहीं है कोई ?

पक्का भगवन ने उनकी पुकार सुन ली होगी आखिर अन्याय कब तक देखते?

खैर अब में विराम देता हूँ ,यही सब कारण मेरे दिमाग में आऐ  |

ये सब मेरे दिमाग की उपज थी बुरा मानने वाली बात इसमें कुछ भी नहीं है ,मुझे कुछ नहीं पता की ये सही है या गलत !

मगर ये खबर आपको चौंका देगी अगर आप युवा हैं और अगर आप रसिक हैं तो ये आपके लिए हृदय आघात है |

हाँ अगर आप कोई पुराने विचारों वाले (मेरे पेरेंट्स ) वाले अभिभावक हैं ,तो ये आपके लिए अत्यंत हर्ष का विषय हैं क्योंकि आपका वो नालायक बेटा या फिर आपकी प्राण प्यारी  बिटिया शायद आपको कभी ये सच ना बताते हों की वो कहाँ घूम रहे हैं? या फिर क्या कर रहे हैं ?मगर अब वो काम पुलिस अच्छे से करेगी बिलकुल जीपीएस की तरह वो आपको समय समय पर बताएंगे ,आपका बच्चा यहां गुल खिला रहा है इसके साथ !

अब कुछ सभ्य पढ़े लिखे अभिभावक भी होंगे ,जिन्हें ये गलत लग रहा होगा , जो मानव अधिकार का हनन बताना चाहेंगे और बोलेंगे ये कतई बर्दाश्त नहीं !तो उन सबसे मै क्षमा चाहूँगा ,ये सिर्फ एक व्यंग है |इसे व्यक्ति विशेष या फिर राजनीती से भी नहीं जोड़ना ,मैं मोदी जी और योगी जी दोनों का सम्मान करता हूँ|

धन्यवाद!

©Confused Thoughts
अब मै सीधे आप लोगों से बात करना चाहता हूँ!

           कैसे हैं आप सब लोग? , आपसे क्षमा चाहूँगा, मेरी हिंदी कहानी के अगले भाग में काफी देरी हुई है| ,असल में मैंने अभी वो लिखा ही नहीं काम की इतनी व्यस्तता है , अब आप सोच रहे होंगे सारा दिन तो सबके पोस्ट पर कमेंट करता रहता हूँ , हाँ मुझे आप लोगों को पढ़ने में मजा आता है कैसे भी करके आपके विचार पढ़ लेता हूं !              

बोधकथा-The Orphan Boy and The Evil Witch

We’ve all heard stories from our mothers, grandmothers and other homegrown bards. I too, grew up listening to such stories. Most of them came from the Mahabharat, the Jatak Kathas, some from Baba Yaga and the likes of Cinderella. But some special stories were my Mother’s own imagination. This tale was one such figment of her mind, that stayed with me forever. And now, I long to tell this to my own daughter, when she’s old enough to understand the moral behind this story. The original was in Hindi mixed with a few Garhwali words and inventive inventives used by my Mother. I, on account of many readers being uncomfortable with Hindi, have translated it as best as I could into a poem in English.

 

 


 

An orphan boy with seven aunts,

Lived from day to day on their alms,

He’d clean their pots, their fields, their rooms,

And in return he’d get some food.

 

One day, thus spake his seventh aunt,

‘Dear boy, I have naught but a magical plant,

‘Tis a magical golden fruit seed,

Sow it and thou shalt reap,

Golden fruits rich and ripe,

More than enough for you to survive.

 

The orphan boy whilst dubious,

Still went forth to the nearest woods,

Where he sowed the wee golden seed,

Wishing, hoping the seed would grow into a tree.

 

The day the seed sprouted some leaves,

The boy wished hard upon the tree,

‘Golden tree’, he said, ‘grow big and tall,

So I may never have to beg for alms’

 

When finally the golden tree did bear fruit,

The boy elated sang and sprang up its roots,

He bit into the first golden pod,

And thanked his good Aunt and the Gods,

For fruit this delicious he had never savoured

He ate and ate and still more did he favour.

 

In the woods there too was an evil witch,

Black of heart and a cannibalist.

She found the orphan boy’s retreat,

And schemed to capture him for a boy-feast.

 

She donned the garb of an old maid,

And up to the tree she went and said,

‘Dear boy, with the tree so fine,

Lend me some fruit, if you do not mind’.

 

The boy was loathe to part with his fruit,

But there was plenty for him thus he could.

He aimed some at the maid’s skirt,

But she could catch naught and they fell on the earth.

‘Ah! But I’m an old maid, I can not see,

Won’t you be kind enough to get down the tree?’

 

The boy rolled his eyes but got down the tree,

While the witch looked on in obvious glee.

The moment the boy offered his fruit laden hand

The witch snatched him up and put him in a sack!

 

And off she went to her dreary hut,

Where she called her daughter, the dumb and mute.

She told her what she had in the sack,

‘Ready the cauldron, wee wench, till I come back.’

 

She went off into the woods to gather some carrots and beets,

While she dreamed of a boy-feast, laden with sauce and cream,

While in the hut the dumb girl undid the bag,

She looked at the sleeping boy in the sack.

 

Thought she, ‘he is asleep, let me go on,

And shred some turnips, cabbage and sweet corn’.

She left the boy in the bag upon the hut’s floor,

And the fool that she was, left ajar the room’s door.

 

And so the boy who was as yet feigning slumber,

Slipped out of the sack thanks to the wench’s blunder.

He came upon a dagger short and sharp,

And before you knew it, had stabbed the girl through the heart.

 

He undressed her and donned her clothes,

And her meat he carved out and shoved into the stove.

When the witch came back she told him to stir the pot,

While she unknowingly sprinkled herbs in the broth.

 

And inwardly the boy did laugh,

‘Soon, soon you old hag’, he thought.

‘Your joy will turn to tears bitter,

While I’ll burn this hut down so no child comes hither’

 

When the feast was laid out the witch made haste,

And as the first morsel she did taste,

She crooned in utter delight and bade,

The boy dressed as the girl to cut in with his blade.

 

But the boy told her he must first attend to nature’s call,

He went out and shut the doors, the windows and all.

He put fire to the hut and jeered at the hag,

‘No more shalt thou eat poor souls from your sack’.

 

‘For what you eat is your daughter sweet,

That is a memory for you to keep.

You reap as you sow, hence should you mind,

Never to do ill upon your own kind’.

And thus the boy went back to his golden tree,

Upon its limbs he lived on, merry and free.

 


Moral of the Story

 

One should never wish ill upon the others. What goes around, comes around. It wouldn’t be long before you find yourself trapped in the same ditch you dug up for others. Stay contended with what you have.

 

Pradita Kapahi, 2017.

Blog: thepraditachronicles.com


 

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so next week I will be back with new story

good bye

have a nice day!

नुमाइशें

ये रंग रोगन रूप यौवन ,

चमक दमक और जवानी 

खेल है सिर्फ दस साल का 

फिर दाद ,खाज , खुजली 

जोड़,पीठ ,गर्दन दर्द बीमारी

यही होगी हर एक की कहानी !
ये खिलता सा यौवन ,

मुरझा सा जायेगा 

चमकता हुआ ये चेहरा 

   धूल    खायेगा !
आज तुम कोई चाँद हो शहर का 

कल तुम्हारी जगह लेने कोई और चाँद आयेगा ,

ये नुमाइशों के सिलसिले जमाने में 

तारीख दर तारीख़ चलेंगे ,

कुछ रसिक लुत्फ़ उठाएंगे नुमाइश का 

फिर वो भी अपने घर निकल लेंगे !
बाद में जब कभी नुमाइश से ऊब जाओ 

तो तहज़ीब वाले मुहल्ले में आकर तो देखना ,

इस झूठ वाले मक़ान के उस फ़रेबी झरोखे से पर्दा हटाकर देखना !
वो खूब दूर तलक गरीब खाने नज़र आएंगे 

तब जाकर तुम्हे रिश्ते नाते ,तौर तरीके सब अच्छी तरह समझ आएंगे ,

और फिर तुम्हे तुम्हारी औकात ,रुतबा 

दोनों बिलकुल साफ साफ दिख जायेंगे !
©Confused Thoughts

अंतिम दृश्य (भाग -8 )

कुदरत भी क्या खूब खेलती है पहले खुद अंजान लोगों को एक दूसरे से मिला देती है , सारे मोह बंधन ,रिश्ते नाते बनाती है फिर एक क्षण में सब कुछ खत्म 

बाद में रह जाती हैं सिर्फ यादें और जब ऐसी यादें आती हैं तो साथ में अश्रु धारा अनायास ही निकल आती है !

शक्तिप्रसाद की स्थिति उस हंस के जैसी है जिसका जोड़ा अब टूट चुका है और हंसिनी के वापस आने की अब कोई उम्मीद बाकि बची नहीं है !

वो घर के बाहर दरवाजे के बाईं तरफ वाले कोने पर जो खाट पड़ी है वहां अब शक्तिप्रसाद ने ठिकाना बना लिया है , सारा दिन यहीं एक जगह बैठे बैठे बिता देते हैं वहीं बैठे-बैठे और मंदिर जाना तो बिलकुल बन्द है मानो भगवान् से रुष्ट हों !

बच्चे कब तक रुके रहते उनकी भी अपनी ज़िन्दगी है भाग दौड़ भरी , धीरे धीरे सभी विदा हो गए अब बस बचे थे सुधीर और सुधीर की पत्नी , बच्चे तो कबके जा चुके आखिर भई उनके स्कूल्स थे , अंग्रेजी स्कूल में बच्चे पढ़ते हैं ज्यादा छुट्टी भी तो नहीं ले सकते पहले जमाने कुछ और थे जब लोग एक महीने ननिहाल में बिता देते थे और स्कूल वाले भी कुछ नहीं कहते थे मगर आजकल तो घर फ़ोन कर दिया जाता है कि आपका बच्चा स्कूल क्यों नहीं आ रहा है ?

खैर इतनी लंबी छुट्टी तो सुधीर की भी नहीं थीं जैसे तैसे दफ्तर में अर्जी दी थी तब जाके १५ दिन की छुट्टी मुहैय्या करायी गयीं थी अब तो वो भी पूरी होने जा रहीं हैं , सभी रिश्तेदार बोलके गये हैं अपने पिताजी को भी साथ ही ले जाना इन्हें यहां गांव में कौन रोटी देगा ?

ठीक ही कह रहे थे सब लोग आजकल कौन किसकी पूछ कर सकता है खुद अपने परिवार की नहीं करते कुछ लोग तो पडोसी की तो कोई जब करेगा !

वैसे भी बुढ़ापे में एक दूसरे के अलावा और कौन इतना सहारा दे सकता है , ऐसे समझो जैसे दोनों एक दूसरे की लाठी हों जब तक लाठी ना हो तो घूम फिर नहीं सकते !

सुधीर बाहर बैठा है , बाकि कुछ गांव के लोग भी बैठे हैं आस पास सुधीर शक्तिप्रसाद से धीमे स्वर में बोलता है “पिता जी हम लोग कल सुबह शहर निकलेंगे और घर पर ताला लगाकर चाबी चाची को दे चलेंगें वो कभी कभी आंगन में झाड़ू लगा दिया करेंगी !”

शक्तिप्रसाद तो किसी और ख्याल में डूबे थे शायद या फिर बात सुनकर भी अनसुनी कर दी और कुछ बोले नहीं अब सुधीर भी शान्त हो गया अपनी बात पूरी करने के बाद , कुछ समय के लिए शांति रही तभी बीच सन्नाटे को चीरते हुए आवाज निकली –

“हाँ चाचा अब आप भी जाइए वैसे भी गांव में कहाँ कुछ रखा है सुधीर के साथ रहेंगे तो बाल बच्चे पर भी बड़े बूढ़े का साया रहेगा और आपका भी मन लगा रहेगा !”

ये स्वर थे पड़ौस के  कालू के , कालू उम्र में तो सुधीर से १०-१२ साल बड़ा था मगर पड़ौस में रहता था तो दोनों दोस्त जैसे ही रहते थे,हाँ दोस्त ही समझो जो एक दूसरे के सुख दुख में काम आ जाएं वो दोस्त ही कहा जायेगा वरना आजकल तो दोस्ती की परिभाषा ही बदल गयी है !

“हाँ ठीक है ” बड़ी देर में शक्तिप्रसाद ने बिना मन के ये बात बोली मानो ये बात बोलने में उन्हें बहुत कष्ट हुआ हो !

और कहते भी क्या बेचारे उनकी हालत तो उस मुसीबत में फंसे राहगीर के जैसी है जिसके सामने कुंआ है और पीछे गहरी खाई अगर आगे बढ़ा तो कुँए में गिरेगा और पीछे हटा तो गहरी खाई में गुम हो जायेगा और ये घर , गांव उसके लिए खाई ही तो हैं मधुमती की स्मृतियों की गहरी अंधकारमयी खाई जो संकरी भी है इसलिए शक्ति प्रसाद ने भी कुँए में कूदने का मन बना लिया था!

अब आप सोच रहे होंगे सुधीर के साथ जाना कुआँ कैसे हुआ तो वो मैं बताता हूँ 

जिस व्यक्ति ने बचपन ,जवानी और प्रौढ़ , बुढ़ापा सब कुछ इसी गांव में देखा है उसके लिए शहर जाना किसी कुँए से कम भी नहीं है !

सावन , बरसात , पूस की वो सर्द रात  सारे रंग देखें हैं उसने अपने खेतों में , जब जब फागुन में गेंहू की फसल लहलहाती थी तो उसे ऐसा आनंद मिलता था मानो कोई छोटा बच्चा चलना सीख गया हो और बच्चे का बाप उसे देखकर प्रफ्फुलित हो रहा हो !

और बरसात के बाद धान की हरियाली उसे इतनी ठंडक पहुंचाती थी जितना किसी हवेली में लगी ए. सी. मशीन भी नहीं पहुंचाती होगी और पशुओं के साथ तो वो ऐसे उपहास करता था मानो संगी साथी हों !

अब आप ही बताओ कोई कैसे उन खड़ंजों को भूल जाये जिनसे उसकी वर्षों पुरानी जान पहचान थी वो गलियां जो बोलती तो कुछ नहीं हैं मगर शक्तिप्रसाद के कदमों की आहट को भलीभांति जानती थीं अब आप ही बताओ इतने सगे संबंधी को छोड़कर किसी अनजान पराये शहर में जायेगा तो उसके लिए चुनौती से कम है क्या ? वो शहर की तेज़  रफ़्तार जिसमें परायेपन की पूर्ण झलक है , वो शहर की मतलबी हवा जो पल पल अहसास कराती है कि यहां अपनेपन का कोई स्थान नहीं है और शहरों की रौनक चमक दमक बताती है कि अपने मजे में मस्त रहो सब किसी से कोई हमदर्दी मत रखो क्योंकि यहां तेरा कोई अपना नहीं है !

शहर में मकान छोटे होते हैं इन छोटे मकानों से मुझे कुछ याद आया जो कहीं पढ़ा था मैंने 

“छोड़ आये जो हजार गज की हवेली गांव में 

वो आज शहर में पचास गज के मकान को अपनी तरक्की बताते हैं ”

खैर ये सब मेरे दिमाग की उपज है सबका नजरिया एक जैसा नहीं होता और शहर में सब छोटे मकान में भी नहीं रहते कुछ लोग बड़ी हवेलियों में भी रहते हैं अपने छोटे छोटे दिल और २-४ पालतू महंगे कुत्तों के साथ !

अब कहानी पर आते हैं , सुधीर तो सारी तैयारी कर चुका है गाड़ी बाहर खड़ी है , शक्तिप्रसाद के कपडे भी एक बैग में रख लिए और अपना सामान भी रख लिया बांधकर रख दिया और घर पर ताला लगा दिया गया चाबी पड़ौस की चाची को दे भी दी और अब सारे लोग गाड़ी में बैठकर निकल पड़े शहर की ओर

गाड़ी आगे बढ़ रही है और विचारों का पहिया भी सबके दिमाग में बराबर चल रहा है खैर ये कोई पहली बार नहीं हो रहा , बहुत लोग हर साल अपना घर छोड़कर शहर बस जाते हैं !
आगे पढ़ें !

……….

भाग-१

भाग-२

भाग-३

भाग-4

भाग -५

भाग-६

भाग -७
© Confused Thoughts

ये वाला भाग मैंने लिख लिया था बहुत दिनों पहले मगर कुछ कारणों से मुझे गायब होना पड़ा और मैने आपके बहुत सारे पोस्ट मिस कर दिए आपसे क्षमा चाहूँगा कभी कभी सब कुछ अपने हाथ में नहीं होता मगर अब फिरसे उपस्थित हूँ आशा है आप अपने विचार कमेंट में बताएंगे धन्यवाद

Selfish or self care- part-3

Lot of boys and girls are waiting outside a small house after 10 min the door is opened and a old age man came outside the house and asked “Are you guys waiting for 5-6pm batch “.All student student say yes in loud voice .

Actually this is English coaching and today new batch is going to start , Rohan was also there in crowd with his 2-3 friends and now all of them enter in them small room which is being messy with the strength of 20 student even all are stranger to other one . You can better understand how coaching batch starts .

As we know very well boys count the girls and girls also want to know how many smart guys are in our batch bytheway during this session a girl enters in room and asks to is this English batch ?

Rohan answers – yes ( he get nurvous when he try to do interact with any girl that’s why he said just yes )

She is damn pretty , height 5’2,very fair complaction eyes were sparkling like a star and trendy dress is inhancing her beauty 100% more .

“So all students pay attention ! Take out your note books and note it out some points ” _ teacher speak up  now all student keep silence and start writing on their notebooks but most of boys were still staring her some of them were planning to interact with her in any how but Rohan is different is writing like loosers , he is just trying to behave like he don’t care about her actually he does but his shy nature stopping him to do any nonsense finally class get over all are returning to their homes .

“Hey ….” Voice comes to Rohan’s , he turn back and get surprised  and says “hello” she is again Infront of him .

“May I know you ” she asks 

“Sorry I don’t remember  but your face seems known ”

“Ummm what’s your name ?” Confusingly she asks 

“Hmm Rohan ” he says in nurvous pitch 

Oh my god ! See I said so na , I know you my name name is Nikita ” she says (giggling )

“you Nikita Arora class_3rd A roll no.10 “Rohan said surprisingly 

“Oh god ! You haven’t forgot anything thank God ” she says with proper expression 

“Actually mine was roll no 12 so I still remember “Rohan reply back with huge smile. 

She laugh for a moment again. Rohan says ” I thought that you moved on to other city with your parent ” 

“No yaar !I changed school only ,  my dad wanted to take me there but I refused yar I love my grandmaa very much and I can’t leave her alone “nikita says with her serious face 

“Ohhhh I see ” Rohan says 

“OK yaar  I have to leave now cz I am getting late ” Nikita says 

“Yeah sure bye ” Rohan return back to home .

Next day again. She come to him after coaching and this process repeats again and again ,most of time they discuss about study and coaching etc .

One day she come to him and says “yaar Rohan can you please come there in park on Sunday , I am very weak in maths so you will help me  ”

“Sorry Nikki you can give your doubts on paper and I will give you solutions after that day but yaar I can’t come there because I have lot work on Sunday ” Rohan says with sorry face 

“Ummmm ! Yaar you don’t know about my condition if you won’t help me then I am gonna fail in board exams please yaar help me ” 

Few seconds after Rohan says “okay I will try ” 

“Thank you yaar! thank you thank you “she says with alot happiness like she has scored 80% in boards actually she knows that he is brilliant boy and he can better help her to solve mathematics .

And now on every Sunday they go to the park and do study there. Their life is passing around with time , now board exams are too close , both are fully involved in study and Nikita is comfortable with mathematics because maths is fav subject of Rohan even he always stand first in class , you won’t believe most of time teacher tells him that “Rohan would you like to solve this question on board ” he says “yes”

And he solve those questions which haven’t taught in classroom even all student have to surprisingly copy his solutions from board .

Now  Nikita wants to focus on other subjects that’s why she tells “I am thinking that I should pay attention on other subjects so I will have to stay at home for self study ” .

“As you wish !” Rohan says with sad face actually he wanted to show that he don’t care if she is not coming but he was failed to change the face expression and she easily reads his expression or she did not who knows 

She answered “okay ! Now I have to leave ! Bye ” 

Rohan don’t speak a single word even he turn back and move to the home , actually Rohan expected that she will read his face and will try to convince him to understand the problem but he was totally wrong . She just said bye , in my opinion it was addiction , that addiction which comes after caffeine tasting .Yes its first time when a girl came to his life , and now he is addict of that caffeine even he don’t know! why ? 

A boy who always minds gap from girls ,is now addict of girl while they just had study together .He is returning to his home with alot of confusions , a boy who always solves the critical mathmatecal problems ,is stucked in a mystry .

Finally he arrives at home and try to focus on study and do remember some motivational lines to switch his mind from her and finally his eyes get close automatically and goes to sleep .

Suddenly a loud, abusive  voice break his  dreams, and that voice take him out from Dreamland and throw him in hostel room  .Actually His roomate was saying that “oh bloody fucker ! You are getting late for college it’s 8:50 now ” 

And Rohan ran away to bathroom ……………………….

To be continue .


Kindly give your honest feedback if you are reading 

©Confused Thoughts 

बोध कथा – Guest Post Invitation to all 

Note- please scroll and start reading after Hindi paragraph if you are not able to read Hindi . 

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सब लोग 

आशा करता हूं आप सभी अच्छे होंगे और अपने अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट कर रहे होंगे अगर नहीं कर रहे तो मुबारक हो मैं भी आपमें से एक हूँ 

आप सबकी लगभग सभी पोस्ट में पढ़ता हूँ चाहे वो में कॉलेज जाते बस में पढूं या फिर ऑटो में बैठे बैठे आपकी कविता पढ़के मुस्कराता हुआ हॉस्टल जाऊं या फिर वो लैब में थोड़ा भी समय मिला तो आपकी पोस्ट पढ़के मुझे फिर से उमंग उठती है कुछ लिखने की मगर लिखने के भाव मर चुके होते हैं जब मैं 8 बजे का गया हुआ 6:3० बजे शाम को रूम में आता हूँ मगर आज शनिवार और रविवार को मेरा अवकाश रहता है तो कुछ लिखने का मन करता है सो तो आज कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूँ-

दरअसल बात यह है कि हम सभी अपने अपने कार्यक्षेत्र में दौड़ रहे हैं हमे खुद नहीं पता चला कब हम छोटे से इतने बड़े हो गए कब हमारा बचपन निकल गया और जवानी आ गयी और आगे भी नहीं पता चलेगा कब बुढ़ापा आ जायेगा 

कितने लोग पीछे छूट गए पता नहीं , कितनी यादें हैं हमारे पास 

इन सबके बाद भी हमे बचपन याद आता है जो अब वापस नहीं आ सकता , शायद अब आप बड़े हो गए हैं इसलिए बच्चे बनोगे तो अजीब लगेगा 

खैर आज में कोचिंग जा रहा था तभी मुझे स्कूल की एक स्मृति याद आयी , जब हमारे स्कूल में प्रार्थना होती थी तो सबसे पहले सरस्वती माँ के सामने दीप प्रज्जवलन होता था और प्रज्वलित करने के लिए कोई अतिथि बुलाया जाता था या फिर कोई छात्र बुलाया जाता था मगर उसमे एक शर्त होती थी जो भी दीप जलायेगा उसे एक लघु बोधकथा सुनानी होगी, बोध कथा जैसा की नाम से पता चलता है जिसमे कोई शिक्षा हो मतलब बच्चों को कुछ सीखने को मिले 

तो मैंने खूब बोधकथाएँ सुनी थी बचपन में मगर आज बहुत कम याद हैं बाकि भूल चुका , फिर आज ख्याल आया क्यों ना उन्हें ब्लॉग पर लिखा जाये फिर लगा मै अकेला क्यों आप सब भी तो बचपन में कहानियां पढ़ते थे , तो आप भी तो मुझे फिर से वो कहानी सुना सकते हैं छोटा हूँ यार बच्चा समझ के सुना देना 😁

बस इस बार अंत में मोरल भी देना होगा ताकि बच्चे कुछ सिख सकें , 

अगर आपको आईडिया पसंद आया तो मेरी ईमेल पर अपनी स्टोरी सेंड कर सकते हैं और में वीकली एक बोधकथा पोस्ट करूँगा. 

प्रारूप –

१- अपना लघु परिचय ताकि में लोगों को आपके बारे में बता सकूँ 

२- कथा (प्रयास करना कम शब्दों में )

3- शिक्षा (मोरल )

आप अपने किसी दोस्त को भी शेयर कर सकते हैं जरूरी नहीं वो कोई ब्लॉगर हो !

ईमेल – shubhankarsharma428@gmail.com
Hello guys !

Hope you all are doing well !

I know some of you were amazing reading the above part , I am sorry I want to send this message to all that’s why I have to write this again because you all are also special to me (mostly people who are from other countries )

Actually today I was thinking about my school days , you also do miss your school days 

One thing still comes to my mind when we finished our prayer session in school after that our teachers , or any guest or any student took the small time to tell something , mostly all guests had to tell a short story to all student and at the end of story he/she had to give a moral of story (with positive message ) .

It is called “Laghu-katha” in Hindi लघुकथा as I discussed above Laghu-katha means a short story which is meaningful as well as it contain a learning message to children’s . 

It was all about child development . 

So today I thought that why not ! I should start posting those stories , I think you all want to refresh your childhood , you also did read alot short stories even you still remember why don’t you collaborate with me , oh if you think it’s good idea then get ready , we will start posting one story on Sunday and you can send your story to my email 

Format will be like – 

1- your small intro (it will be helpful to me with the help  of it can introduce you )

2- short story (try to tell in minimum words )

3- moral of story (in simple words (child can learn ) 

Email me – shubhankarsharma428@gmail.com 

Please share this invitation with your friends who are new on WP and also can invite non blogger .

Thank you !

Don’t forget to give your views , put comment in comment box 

Love you all 

Bye

Unrequited Love 

Baby

You are free in your life 

Please don’t waste your time 

I am your addict it’s my problem 

No need to make any rhyme .

Actually I always do sinful acts 

This is issue is all about my crime .

 

I made that nonsense 

Cz My thoughts  were totally confused 

I won’t blame you 

You did not try to make me seduced .

I fall in love with you 

it was cause of  the theory of motion 
When you comes 

Heart can’t control it’s emotion .
If I am responsible for my circumstance

You should not be tensed about it 

I don’t expect your existence 

Even I won’t blame you ,got it .
My goal , destination, visions 

All are undecided 

But my love is remain constant 

It’s deep and still one sided . 


©Confused Thoughts